03-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के बीच नागरिक विमान ‘सुखोई सुपरजेट-100’ (एसजे-100) के भारत में निर्माण को लेकर हुए समझौते ने रक्षा और विमानन जगत में नई हलचल पैदा कर दी है। इस डील को ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी उठ खड़ा हुआ है, वही यह कि क्या इसी साझेदारी के रास्ते रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट ‘सुखोई एसयू-57’ को भारतीय वायु सेना में शामिल करने की जमीन तैयार कर रहा है? एसजे-100 एक क्षेत्रीय नागरिक जेट है, जिसका भारत में उत्पादन होने से देश के एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल नागरिक विमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भविष्य के बड़े सैन्य सहयोग के लिए ‘टेस्ट केस’ के तौर पर देखा जा रहा है। इसी कड़ी में यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के सीईओ वादिम बदेखा के हालिया बयान ने अटकलों को और तेज कर दिया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि भारत और रूस एसयू-57ई के संयुक्त या लाइसेंस प्राप्त उत्पादन की संभावनाओं पर तकनीकी स्तर पर बातचीत कर रहे हैं। रूस का एसयू-57 ‘फेलोन’ उसकी वायुसेना का सबसे उन्नत पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इसमें अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता और इंटरनल वेपन बे जैसी खूबियां हैं, जो इसे रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक मारक क्षमता प्रदान करती हैं। यह विमान बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ान भर सकता है। हालांकि, भारत और एसयू-57 का रिश्ता नया नहीं है। भारत पहले रूस के साथ ‘फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट’ (एफजीएफए) प्रोग्राम का हिस्सा था, लेकिन 2018 में लागत, तकनीक हस्तांतरण और प्रदर्शन से जुड़ी चिंताओं के चलते इससे अलग हो गया था। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। रूस ने एसयू-57 के लिए नया और अधिक शक्तिशाली इंजन विकसित करने का दावा किया है, जो पहले की कमियों को दूर कर सकता है। दूसरी ओर, चीन के पास जे-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती तैनाती से भारत पर भी अपने स्टील्थ फाइटर बेड़े को मजबूत करने का दबाव बढ़ा है। हालांकि, रास्ता आसान नहीं है। रूस से बड़े रक्षा सौदों पर अमेरिका के प्रतिबंधों का खतरा और भारत की ‘पूर्ण तकनीक हस्तांतरण’ की शर्तें इस सौदे की सबसे बड़ी चुनौती हैं। फिलहाल भारतीय वायु सेना का फोकस राफेल के अतिरिक्त बैच, तेजस और भविष्य के स्वदेशी एएमसीए प्रोजेक्ट पर बना हुआ है। ऐसे में एसयू-57 भारत कब आएगा, यह रूस के प्रस्ताव और भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर ही निर्भर करेगा। हिदायत/ईएमएस 03 फरवरी 2026