नई दिल्ली,(ईएमएस)। पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी इन दिनों भारतीय राजनीति और सैन्य गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक सेना की कमान संभालने वाले जनरल नरवणे की यह पुस्तक अपनी रिलीज से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। इस अप्रकाशित पुस्तक के कथित अंशों को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सरकार पर किए गए तीखे हमलों ने सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के लिए गोपनीयता और प्रकाशन नियमों से जुड़े सवालों को फिर से जीवित कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि वह इस संस्मरण के उस मसौदे के कुछ अंश पढ़ना चाहते थे, जिसमें 31 अगस्त 2020 की एक घटना और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ हुए गतिरोध का जिक्र है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस किताब के खुलासे से डरी हुई है। राहुल गांधी का तर्क है कि यदि यह किताब प्रकाशित होती है, तो देश को पता चल जाएगा कि चीन के सामने सरकार का रुख कैसा था। वहीं, सरकार और सत्ता पक्ष ने इन दावों को काल्पनिक करार देते हुए राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने और सेना पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है। तकनीकी और कानूनी रूप से देखा जाए तो यह पुस्तक फिलहाल अधर में है। जनवरी 2024 में प्रस्तावित इसकी रिलीज को रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना के निर्देशों के बाद रोक दिया गया था। नियम स्पष्ट हैं कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, विशेष रूप से जो संवेदनशील पदों पर रहे हैं, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट से बंधे होते हैं। इस कानून के तहत कोई भी पूर्व अधिकारी ऐसी जानकारी साझा नहीं कर सकता जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हो। किसी भी पुस्तक या लेख के प्रकाशन से पहले सरकार से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट या क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होता है। यदि इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा चलाया जा सकता है और सीसीएस (पेंशन) नियमों के तहत उनकी पेंशन भी रोकी जा सकती है। विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर है कि 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद से चीन के साथ संबंध अत्यंत संवेदनशील दौर में हैं। हालांकि वर्तमान में एलएसी पर स्थिति कुछ हद तक शांत है, लेकिन दोनों देशों की भारी सैन्य तैनाती बनी हुई है। ऐसे में किसी भी रणनीतिक जानकारी का खुलासा सीमा पर स्थिति को पुन: तनावपूर्ण बना सकता है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी का सार्वजनिक होना देश के हित में नहीं है, यही कारण है कि जनरल नरवणे की इस पुस्तक को अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। दूसरी ओर, विपक्ष इस देरी को सरकार की विफलता छिपाने की कोशिश बता रहा है। कांग्रेस का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष को संसद में बोलने से रोका जा रहा है क्योंकि वे उस सच्चाई को उजागर करना चाहते हैं जिससे सरकार डरी हुई है। इस पूरे प्रकरण ने सेवानिवृत्त अधिकारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्र की सुरक्षा के बीच के महीन संतुलन पर एक नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल, फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी के पन्ने कब जनता के सामने आएंगे, यह रक्षा मंत्रालय की समीक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलता पर निर्भर करता है। वीरेंद्र/ईएमएस/03फरवरी2026