इस्लामाबाद,(ईएमएस)। वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच हुए हालिया व्यापारिक समझौते ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को अप्रत्याशित रूप से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो कुछ समय पहले तक 50 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बना हुआ था। भारत के लिए यह फैसला एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत माना जा रहा है, लेकिन इसने पड़ोसी देशों, विशेषकर पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान में इस फैसले को लेकर सबसे ज्यादा बेचैनी देखी जा रही है, क्योंकि वह लंबे समय से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की कोशिशों में जुटा था, लेकिन परिणाम उसके पक्ष में नहीं रहे। पाकिस्तान की नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही इस्लामाबाद ने अमेरिकी प्रशासन के प्रति बेहद नरम और सहयोगी रुख अपनाया था। पाकिस्तान ने हर वैश्विक मुद्दे पर अमेरिका की हां में हां मिलाई, यहाँ तक कि ट्रंप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार तक की मांग कर डाली थी। इसके अलावा, पाकिस्तान ने गाजा विवाद में अमेरिकी रुख का समर्थन करते हुए वहां अपनी सेना भेजने की सहमति दी और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का फैसला किया। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने भी अमेरिका के कई दौरे किए और महत्वपूर्ण खनिज (रेयर अर्थ मिनरल) देने का वादा किया। इन तमाम कोशिशों के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत टैरिफ बरकरार रखा है, जो अब भारत को मिलने वाली दर से अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि जब भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू था, तब पाकिस्तानी खेमे में इस बात की खुशी थी कि उन्हें भारत के मुकाबले कम टैक्स देना पड़ रहा है। इसे पाकिस्तान में ट्रंप की दोस्ती के इनाम के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि, भारत के लिए टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने के ट्रंप के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि दक्षिण एशिया में अमेरिका की प्राथमिकता सूची में कौन है। अमेरिका ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अंतरराष्ट्रीय रिश्ते केवल खुशामद से नहीं, बल्कि बराबरी और राष्ट्रीय हितों के सम्मान पर टिके होते हैं। इस फैसले के बाद पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर आम जनता और विशेषज्ञों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई पाकिस्तानी यूजर्स का कहना है कि भारत ने कभी ट्रंप की चापलूसी नहीं की, फिर भी उसे बेहतर डील मिली, जबकि पाकिस्तान सब कुछ दांव पर लगाकर भी खाली हाथ रहा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ गहन बातचीत के बाद रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ को भी पूरी तरह हटा लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया है। भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने भी इस नतीजे को एक सफल कूटनीति का परिणाम करार दिया है। भारत को मिली इस व्यापारिक राहत ने स्पष्ट कर दिया है कि एक स्पष्ट रणनीति और आत्मसम्मान के साथ की गई कूटनीति ही वैश्विक मंच पर वास्तविक लाभ दिलाती है। वीरेंद्र/ईएमएस/03फरवरी2026