इस्लामाबाद(ईएमएस)। पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान इस समय भीषण हिंसा और अस्थिरता की चपेट में है। पिछले कुछ दिनों में हुए सिलसिलेवार आतंकी हमलों और उसके बाद सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पड़ोसी देश चीन ने सुरक्षा चिंताओं के चलते ग्वादर बंदरगाह परियोजना से जुड़े अपने सभी नागरिकों और कर्मचारियों को वहां से निकाल लिया है। देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में स्वीकार किया कि बलूचिस्तान की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उग्रवाद पर लगाम लगाने के लिए प्रांत में और अधिक सैनिकों की तैनाती की तत्काल आवश्यकता है। रक्षा मंत्री के अनुसार, सुरक्षा बलों ने अब तक विभिन्न अभियानों में 177 उग्रवादियों को ढेर किया है, लेकिन भौगोलिक चुनौतियों के कारण हिंसा पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि बलूचिस्तान देश के कुल भूभाग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है, जिसकी सुरक्षा करना किसी एक शहर को संभालने जैसा सरल कार्य नहीं है। हिंसा का सबसे भयावह रूप शनिवार सुबह देखने को मिला, जब प्रांत के 12 प्रमुख शहरों और कस्बों में एक साथ हमले किए गए। क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग और पंजगुर जैसे इलाकों को निशाना बनाते हुए हमलावरों ने आम नागरिकों पर भी गोलियां बरसाईं। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इन आत्मघाती हमलों में दो महिलाएं भी शामिल थीं। इन हमलों के जवाब में सेना ने बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मारे गए विद्रोहियों में से अधिकांश के शवों को कानूनी प्रक्रिया के लिए अस्पतालों में भेजा गया है। सरकार ने इन सुनियोजित हमलों के लिए प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारियों का दावा है कि कई आपराधिक गिरोह भी इस संगठन की आड़ में सक्रिय हैं, जिससे आतंकवाद और अपराध का एक खतरनाक गठजोड़ बन गया है। फिलहाल, बलूचिस्तान में तनाव चरम पर है और सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/03फरवरी2026