03-Feb-2026
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- जन सहयोग से बदली जा रही सरकारी स्कूलों की तस्वीर, 3 हजार से अधिक कुर्सी-टेबल तैयार ग्वालियर ( ईएमएस ) | जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान द्वारा प्रारंभ किया गया “शिक्षा मित्र” नवाचार आज जन सहभागिता का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के तहत स्कूली बच्चों को जन सहयोग से टेबल और कुर्सी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे कक्षा कक्षों में पढ़ाई का माहौल बेहतर हो सके। इस नवाचार की शुरुआत स्वयं कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के ₹1 लाख रुपए के व्यक्तिगत सहयोग से हुई। इसके पश्चात विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार स्वेच्छा से सहयोग राशि प्रदान की। कलेक्टर की इस संवेदनशील पहल को जिले के नागरिकों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों का भी भरपूर समर्थन मिला। शिक्षा मित्र कार्यक्रम के तहत उन शासकीय स्कूलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी-टेबल की कमी थी। उद्देश्य स्पष्ट है—हर बच्चे को सम्मानजनक और सुविधाजनक बैठने की व्यवस्था मिले, ताकि वह पूरे मनोयोग से अध्ययन कर सके। कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक जिले में 1500 से अधिक कुर्सी-टेबल तैयार कर विभिन्न स्कूलों में भेजी जा चुकी हैं। इसके साथ ही 1500 से अधिक कुर्सी-टेबल निर्माणाधीन अथवा तैयार अवस्था में हैं, जिन्हें आगामी दिनों में स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। इस प्रकार आने वाले समय में जिले के हजारों बच्चों को इस पहल का सीधा लाभ मिलने वाला है। “शिक्षा मित्र” कार्यक्रम में मिल रहा अभूतपूर्व जन सहयोग यह दर्शाता है कि यदि प्रशासन पहल करे तो समाज भी पूरे मन से साथ खड़ा होता है। कलेक्टर रुचिका चौहान की इस पहल ने शिक्षा को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर सामूहिक सामाजिक दायित्व के रूप में स्थापित किया है। कलेक्टर श्रीमती चौहान का यह नवाचार न केवल जिले की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त कर रहा है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बनता जा रहा है। “शिक्षामित्र” अभियान यह साबित करता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।