लेख
04-Feb-2026
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भगवद्गीता में कर्म को जीवन का मूल आधार बताया गया है। गीता के अनुसार मनुष्य बिना कर्म किए रह ही नहीं सकता, इसलिए कर्म से भागना नहीं बल्कि उसे सही भावना के साथ करना ही धर्म है। श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हैं कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल पर नहीं। वास्तव में भगवद्गीता का संदेश बहुत सीधा है। जीवन में कर्म करो, पर अहंकार कभी भी नहीं।कर्तव्य निभाओ, पर आसक्ति नहीं।और जीवन में जो भी मिले, उसे ईश्वर का प्रसाद समझकर स्वीकार करो। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैंकर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। तात्पर्य यह है कि हे अर्जुन ! तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। गीता में कर्म के तीन रुप बताए गए हैं -सात्त्विक कर्म,राजसिक कर्म और तामसिक कर्म। सात्विक कर्म से तात्पर्य है बिना फल की आसक्ति के कर्तव्य भाव से कर्म करना। राजसिक कर्म से तात्पर्य है जो कर्म अहंकार, लाभ, यश या स्वार्थ के लिए किया जाए। वहीं पर तामसिक कर्म से तात्पर्य है जो अज्ञान, आलस्य या दूसरों को हानि पहुँचाने के लिए किया जाए। वास्तव में यह मनुष्य के पतन का असली कारण बनता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि जब व्यक्ति स्वार्थ, अहंकार और फल की आसक्ति छोड़कर कर्तव्य भाव से कर्म करता है, तो वही कर्म बंधन का कारण नहीं बनता बल्कि मुक्ति का मार्ग बन जाता है। गीता यह सिखाती है कि निष्काम कर्म ही सच्चा कर्मयोग है, जिसमें कर्म करते हुए परिणाम को ईश्वर को समर्पित कर दिया जाता है। इस प्रकार भगवद्गीता कर्म को केवल क्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का साधन मानती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि कर्म एक चक्र की तरह घूमता है।दूसरों के साथ किया गया हर व्यवहार, ब्याज समेत लौटकर आता है। यह ब्रह्मांड का अटल नियम है जो बोओगे, वही भुगतोगे। दूसरे शब्दों में कहें तो कर्म सचमुच एक चक्र है-धीरे घूमता हुआ, मगर अचूक।हम जो शब्द बोलते हैं, जो भाव पालते हैं, और जो व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं, वही किसी न किसी रूप में लौटकर हमारे दरवाज़े पर दस्तक देता है। जीवन में अक्सर हमें यह लगता है कि कुछ गलत करके हम बच गए, पर समय उस हिसाब-किताब को चुपचाप लिखता रहता है और जब वह लौटता है, तो सिर्फ मूलधन नहीं-अनुभव, सीख और ब्याज समेत।इसलिए अच्छा होना कोई मजबूरी नहीं, एक समझदारी है, क्योंकि अंततः हम दुनिया से नहीं, खुद से ही मिलते हैं। (सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट व युवा साहित्यकार) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 4 फरवरी /2026