अब रोबोट करेंगे कैंसर की सर्जरी भोपाल (ईएमएस)। एम्स भोपाल के डायरेक्टर और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. माधवानंद ने कहा कि एम्स भोपाल में जल्द ही रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जा रही है, जिससे प्रोस्टेट, हृदय समेत कई तरह के कैंसर मरीजों का अत्याधुनिक तरीके से इलाज संभव हो सकेगा। अगले एक-दो महीनों में यह सुविधा शुरू होने की उम्मीद है। वर्ल्ड कैंसर दिवस के मौके पर डॉ. माधवानंद कर ने कैंसर इलाज को लेकर बड़ा खुलासा किया है। डॉ. माधवानंद कर ने चिंता जताते हुए कहा कि जागरूकता की भारी कमी के कारण आधे से ज्यादा कैंसर मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं, जब बीमारी सेकंड या एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही जानकारी से कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन जानकारी के अभाव में हालात बिगड़ जाते हैं। डॉ. कर ने बताया कि एम्स भोपाल में कैंसर के इलाज की सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। रेडिएशन, कीमोथेरेपी से लेकर सर्जरी तक मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार इलाज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कैंसर पेशेंट सेंटर्ड ट्रीटमेंट की शुरुआत की गई है, जिसमें मरीज के साथ-साथ उनके परिजनों को भी इलाज प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। उन्होंने बताया कि एम्स में रेडिएशन की एक और नई मशीन लगाई जा रही है, जिससे मरीजों को और बेहतर सुविधा मिलेगी। रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के बाद इलाज और ज्यादा सटीक व सुरक्षित हो जाएगा। डॉ. कर ने कहा कि कैंसर मरीजों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें यह नहीं पता होता कि बीमारी के बाद क्या करना है, कहां जाना है और इलाज कैसे शुरू करना है। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग असमंजस में रहते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। एम्स इसी गैप को भरने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कैंसर डे को उत्सव नहीं, बल्कि जागरूकता दिवस के रूप में देखना चाहिए। इस दिन का उद्देश्य लोगों को कैंसर के कारण, बचाव और समय पर इलाज के महत्व को समझाना है। यह दिवस पूरी दुनिया के साथ भारत में भी इसी उद्देश्य से मनाया जाता है। डॉ. कर के मुताबिक कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह लोगों की दिनचर्या, रहन-सहन, कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग और नींद की कमी है। नींद पूरी न होने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ता है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। उन्होंने बताया कि आज भी करीब दो-तिहाई मरीज एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं। अगर समय पर जांच और इलाज हो जाए तो कैंसर का इलाज संभव है। सुदामा नरवरे/5 फरवरी 2026