क्षेत्रीय
05-Feb-2026
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- एनएसयूआई का क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय में प्रदर्शन, पुलिस बुलानी पड़ी गुना (ईएमएस)। परीक्षा शुरू होने से महज एक दिन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश के खिलाफ बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ता और छात्र बड़ी संख्या में क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय पहुंचे और मुख्य गेट पर जमकर प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि मौके पर पुलिस को बुलाना पड़ा। इस दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं, पुलिस और विश्वविद्यालय अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता द्वारा विश्वविद्यालय परिसर को खेत बनाने जैसी धमकी दिए जाने से माहौल और गरमा गया। बाद में स्वयं कुलपति मौके पर पहुंचे और छात्रों का ज्ञापन लिया। दरअसल, 5 फरवरी से एमए, एमएससी और एमकॉम प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होना तय थीं, लेकिन 4 फरवरी को परीक्षा से ठीक एक दिन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर एमए, एमएससी के कुछ विषयों जैसे मनोविज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, फूड एंड न्यूट्रिशन साइंस, बायोटेक्नोलॉजी और क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स में ओल्ड मोड/ऑनलाइन मोड से प्राइवेट छात्रों द्वारा भरे गए परीक्षा फॉर्म निरस्त कर दिए। यह आदेश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अगस्त 2025 के पत्र का हवाला देते हुए जारी किया गया। एनएसयूआई का आरोप है कि इतने लंबे समय तक फॉर्म भरवाने के बाद ऐन वक्त पर परीक्षा निरस्त करना प्रशासन की गंभीर लापरवाही है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य और कीमती समय दांव पर लग गया। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष फलेशुराज सिंह सिसौदिया के नेतृत्व में छात्र विश्वविद्यालय गेट पर पहुंचे और जोरदार नारेबाजी की। संगठन का कहना है कि सर्वर डाउन और वेबसाइट की खामियों के चलते पहले ही सैकड़ों छात्रों के नामांकन और एनरोलमेंट जनरेट नहीं हो पाए थे। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले आदेश बदलना छात्रों के साथ अन्याय है। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई वरिष्ठ अधिकारी बाहर नहीं आया, जिससे छात्रों का गुस्सा और भड़क गया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई और छात्रों को राहत नहीं दी गई, तो संगठन हजारों छात्रों के साथ सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा। काफी देर चले हंगामे के बाद कुलपति स्वयं गेट पर पहुंचे और छात्रों से चर्चा कर ज्ञापन लिया, जिसके बाद प्रदर्शन शांत हुआ। इधर, इस पूरे मामले से जुड़ा एक पत्र भी सामने आया है, जिसे अलग बॉक्स में प्रकाशित किया गया है। इसमें विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई जानकारी का जिक्र है। पत्र में बताया गया है कि विश्वविद्यालय ने 28 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 तक लगभग छह बार परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ाई थी और छात्र हित में 3 फरवरी को भी एमपी ऑनलाइन के माध्यम से लिंक खोली गई थी। चूंकि 5 फरवरी की सुबह से परीक्षाएं शुरू होनी थीं और प्रश्नपत्र व कॉपियां पहले ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंचा दी गई थीं, इसलिए परीक्षा से 24 घंटे पहले दोबारा लिंक खोलना संभव नहीं था। इससे पहले भी इसी मुद्दे पर “लापरवाही की मार: परीक्षा से एक दिन पहले 500 छात्रों का भविष्य अधर में” जैसे शीर्षक से समाचार सामने आ चुका है। अब देखना होगा कि उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन इस विवाद पर क्या फैसला लेते हैं और क्या छात्रों को कोई राहत मिल पाती है या नहीं। सीताराम नाटानी