राष्ट्रीय
06-Feb-2026
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-पढ़ाई कर रहे छात्रों की पहली पसंद बना दिल्ली, यहां ब्रांड की पहचान बनाना आसान नई दिल्ली,(ईएएमस)। दिल्ली में पढ़ाई करने वाले छात्रों का रोजमर्रा का खर्च दूसरे देशों के बड़े शहरों के मुकाबले काफी कम है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश के अन्य महानगर भी विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान को अपनी शाखाएं खोलने के लिए आकर्षित कर रहे हैं, क्योंकि यहां ब्रांड की पहचान बनाना और विस्तार करना काफी आसान होता है। रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली-एनसीआर वैश्विक विश्वविद्यालयों के लिए भारत का सबसे मजबूत बाजार है, जिसमें गुरुग्राम सबसे आगे है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, दूतावासों से निकटता और फॉर्च्यून 500 कंपनियों की मौजूदगी जैसे कारक शिक्षण संस्थानों को फलने-फूलने में मददगार साबित होती है, क्योंकि अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को यहां उद्योगों में आसानी से काम मिल जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 18 से 23 साल की आयु के करीब 15.5 करोड़ युवा हैं, जो विश्व में सबसे बड़ी आबादी समूह है। भारत अब स्थानीय छात्र बाजार से विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए प्रमुख आकर्षण बन गया है। यदि यही रुझान बरकरार रहा तो 2040 तक ऐसे विदेशी संस्थानों की जगह 1.9 करोड़ वर्ग फीट तक पहुंच सकती है। वर्तमान में देश में 19 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान यहां तो चालू हो चुके हैं अथवा उन्हें इसके लिए शिक्षा मंत्रालय से आशय पत्र प्राप्त हो गया है। रिपोर्ट में शहर में शैक्षिक वातावरण उभरने का पता लगाने के लिए आवाजाही, सामाजिक-आर्थिक संकेतक, उद्योग तंत्र और जनसांख्यिकीय अवसर तथा शैक्षणिक परिदृश्य जैसे चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर प्रत्येक शहर के प्रदर्शन का आकलन किया है। अध्ययन के मुताबिक दिल्ली एनसीआर, मुंबई और बेंगलूरु जैसे महानगर बड़े स्तर पर काम शुरू करने के लिए आसानी से अवसर प्रदान करते हैं। इन शहरों में विभिन्न विषयों और स्ट्रीम के छात्र पढ़ते हैं। मुंबई बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, प्राइवेट इक्विटी फर्मों, कैपिटल मार्केट और मीडिया एवं मनोरंजन कंपनियों का गढ़ है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भूमि और जीवनयापन की उच्च लागत बड़े ग्रीनफील्ड परिसरों के विस्तार में बाधा उत्पन्न करती है, लेकिन ब्रांड के विस्तार से लाभ तय होता है। दूसरी ओर बेंगलूरु आईटी, एआई, इंजीनियरिंग और अनुसंधान से जुड़े उद्योगों का प्रमुख केंद्र है, जहां विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों को टेक कंपनियों की भरमार का पूरा लाभ मिल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंदन, न्यूयॉर्क और सिडनी जैसे पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्रों की तुलना में भारतीय शहर बहुत कम लागत में विश्वस्तरीय शिक्षा देकर और पढ़ाई पूरी होने के बाद रोजगार की ज्यादा संभावना के कारण छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। चंडीगढ़ ट्राइसिटी, कोच्चि, गोवा, भुवनेश्वर और जयपुर जैसे तमाम शहर विदेश शिक्षण संस्थानों को अपने यहां परिसर खोलने के लिए आकर्षित कर रहे हैं। यहां विदेशी संस्थानों को कम कीमत में ज्यादा जमीन और कम परिचालन लागत जैसे लाभ मिलते हैं। सिराज/ईएमएस 06 फरवरी 2026