राज्य
06-Feb-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। क्योंकि लोकल ट्रेन से यात्रा करना जानलेवा हो गया है। आलम यह है कि यात्रियों को लोकल ट्रेनों में जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है। खासकर पीक आवर्स में, यात्रियों को ट्रेन के अंदर दोनों पैरों पर ठीक से खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। इस भीड़भाड़ के कारण, लोकल ट्रेनों में यात्रियों की मौत की संख्या भी बढ़ गई है। जानकारी सामने आई है कि अब तक विभिन्न लोकल ट्रेन दुर्घटनाओं में 2287 यात्रियों की मौत हो चुकी है। दरअसल ट्रेन शेड्यूल में देरी, भीड़भाड़ और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण दुर्घटनाओं में रोज़ाना बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल, 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच, रेलवे पर चौंकाने वाली 4,841 दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 2,287 यात्रियों की मौत हुई और 2,554 यात्री घायल हुए। औसतन, विभिन्न लोकल ट्रेन दुर्घटनाओं में हर दिन 13 यात्रियों की मौत होती है। ये आंकड़े रेलवे प्रशासन की विफलता की भयानक सच्चाई को उजागर करते हैं। वहीं लोकल ट्रेनों से गिरने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है। एक साल में ऐसी 1,713 घटनाएं दर्ज की गईं, जिसके परिणामस्वरूप 525 यात्रियों की मौत हुई और 1,188 अन्य घायल हुए। लोकल ट्रेनों में भीड़भाड़, दरवाजों से लटककर यात्रा करना और खचाखच भरी ट्रेनें इन दुर्घटनाओं के मुख्य कारण हैं। जबकि पटरियां पार करते समय होने वाली दुर्घटनाएं दूसरे सबसे आम प्रकार की हैं। ऐसी कुल 1,298 घटनाएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप 1,063 यात्रियों की मौत हुई और 235 अन्य घायल हुए। वहीं पटरियां पार करने वाले यात्रियों की मौत का एक बड़ा कारण पुलों और अंडरपास की कमी है। स्वेता/संतोष झा- ०६ फरवरी/२०२६/ईएमएस