राज्य
06-Feb-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। देश में 18-20 प्रतिशत बच्चे डिजिटल लत के शिकार हैं। इसे देखते हुए एम्स के डॉ. यतन पाल सिंह बलहारा की टीम ने 11 सवालों वाला एक स्क्रीनिंग टूल विकसित किया है। इसके जरिए गेमिंग, सोशल मीडिया और ओटीटी की लत की गंभीरता को स्कोर के आधार पर मापा जा सकेगा। इंटरनेट, मोबाइल और ऑनलाइन गेम की लत बच्चों और युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। हाल के दिनों में गाजियाबाद में तीन लड़कियों की आत्महत्या करने के साथ ही कई घटनाएं सामने आई हैं। अब इस समस्या की समय रहते पहचान के लिए एम्स ने आईसीएमआर के सहयोग से एक खास स्क्रीनिंग टूल विकसित किया है। टूल की मदद से इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली लत का पता लगाया जा सकेगा। इस शोध के लिए आईसीएमआर ने एम्स को फंड जारी किया था। इसके बाद एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के बिहेवियरल एडिक्शन्स क्लीनिक के प्रोफेसर यतन पाल सिंह बलहारा के नेतृत्व में यह स्क्रीनिंग टूल विकसित किया गया। डॉक्टरों ने 112 कॉलेज छात्रों पर अध्ययन कर इस टूल को तैयार किया है। डॉ. बलहारा ने बताया कि देश में 18 से 20 प्रतिशत बच्चे इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण इस लत से पीड़ित हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/06/फरवरी/2026