राज्य
06-Feb-2026


हाईकोर्ट की संयुक्तपीठ ने एकलपीठ में चल रही सुनवाई पर लगाई रोक : अगली सुनवाई 18 को जबलपुर (ईएमएस)। म.प्र. उच्च न्यायालय की संयुक्तपीठ से भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन को एकलपीठ द्वारा अवमानना में दोषी पाए जाने के मामले में शुक्रवार को राहत मिल गई। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने उक्त मामले में एकलपीठ में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय की संयुक्तपीठ ने माना है कि एकलपीठ को अवमानना की कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 18 फरवरी को नियत की गई है। गौरतलब हो कि उच्च न्यायालय में यह मामला मर्लिन बिल्डकॉन प्रा.लि. के डायरेक्टर सतपाल सिंह भाटिया की ओर से दाखिल किया गया है। दायर याचिका में कहा गया है कि भोपाल के श्यामला हिल्स के नादिर कॉलोनी में स्थित उनके 3520 वर्गफीट प्लाट की बिल्डिंग परमिशन 8 नगर निगम द्वारा 28 अगस्त 2025 को निरस्त कर दी गई। इस आदेश को चुनौती देकर यह याचिका 17 सितम्बर 2025 को दाखिल की गई थी। याचिका में आरोपित है कि उच्च न्यायालय में याचिका विचाराधीन रहते नगर निगम ने 18 नवंबर 2025 को विवादित मकान के एक हिस्से को पहले गिराया और उसके बाद उसी दिन याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया। इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ पाते हुए म.प्र.उच्च न्यायालय ने नगर निगम आयुक्त को तलब किया था। मामले पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान निगमायुक्त संस्कृति जैन न्यायालय में उपस्थित रहीं। एकलपीठ ने कहा था कि जब मामला पहले से उच्च न्यायालय और सिविल कोर्ट में लंबित था, तब निगम को किसी भी कठोर कार्रवाई से पहले न्यायालय की अनुमति लेनी चाहिए थी, जो नहीं ली गई। इन परिस्थितियों में एकलपीठ ने निगमायुक्त संस्कृति जैन को न्यायालय की अवमानना का दोषी मानते हुए सजा तय करने के लिए 6 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे हाजिर होने कहा था। एकलपीठ के उक्त आदेश के खिलाफ भोपाल नगर निगम ने संयुक्तपीठ में अपील की। जिस पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की सुबह नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह, अधिवक्ता एसएम गुरु और आकाश मालपाणी हाजिर हुए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने कहा कि‎ सुप्रीम कोर्ट के जिस आदेश के आधार पर एकलपीठ द्वारा अवमानना की जो कार्रवाई की जा रही, वह न्यायसंगत नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उच्च न्यायालय को अवमानना की कार्रवाई करने का अधिकार ही नहीं दिया। यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना हुई है, तो कार्रवाई केवल सुप्रीम कोर्ट कर सकती है। संयुक्तपीठ ने स्पष्ट किया कि अवमानना से जुड़े सिर्फ उन मामले में उच्च न्यायालय को सुनवाई का अधिकार है, जिसमे उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ न्यायालय के आदेशों की अवहेलना हुई हो। इस मत के साथ संयुक्तपीठ ने एकलपीठ के अवमानना आदेश पर रोक लगा दी। अजय पाठक / मोनिका / 06 फरवरी 2026/ 02.02