राष्ट्रीय
06-Feb-2026


-जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजन को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी, जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम जगदलपुर (ईएमएस)। बस्तर की माटी की खुशबू और वहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्वपटल पर अपनी छाप छोडऩे को तैयार है। 7 से 9 फरवरी तक आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 को लेकर अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। बस्तर पंडुम 2026 संभाग स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ देश की राष्ट्रपति महामहिम द्रोपदी मुर्मू करेंगी। राष्ट्रपति के प्रवास को देखते हुए तैयारियां जोरों पर हैं। सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर आदिवासी बहुल इलाके में खासकर बस्तर के लोगों में अदभुत उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि वो मूलनिवासियों और जल, जंगल और जमीन को लेकर उनके साथ विचार साझा करेंगी। इन तीन दिनों में बस्तर की फिजां में जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज, स्थानीय व्यंजन-पेयपदार्थ और नाटकों का मंचन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा। प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक सहित अन्य विधा में हुनर दिखाएंगे। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 फरवरी को किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनके आगमन को लेकर पूरे बस्तर अंचल में उत्साह का माहौल है। यह बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है। आज बस्तर पंडुम एक उत्सव भर नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, अस्मिता और गौरव का प्रतीक बन चुका है। देश-प्रदेश से आने वाले पर्यटक और संस्कृति प्रेमी इस उत्सव के माध्यम से बस्तर की आत्मा को करीब से जानने का अवसर प्राप्त करते हैं। बस्तर पंडुम बस्तर की समृद्ध परंपराओं, विशिष्ट वेशभूषा, पारंपरिक खानपान, जनजीवन और जीवंत लोक-कलाओं को नज़दीक से जानने-समझने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक जड़ों को संजोते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रभावी मंच है।