क्षेत्रीय
07-Feb-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की औद्योगिक इकाइयों, विशेषकर कोयला आधारित पावर प्लांट, स्टील और स्पंज आयरन संयंत्रों में कार्यरत मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि कई उद्योगों में आज भी ओएचसी, योग्य डॉक्टर, एम्बुलेंस और नियमित मेडिकल जांच जैसे बुनियादी प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जनहित याचिका सहित अन्य मामलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों ने विभिन्न उद्योगों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। कई संयंत्रों में गंभीर अनियमितताएं उजागर कोर्ट कमिश्नर अदिति सिंहवी ने बताया कि कुछ उद्योगों में दो बार अभियोजन के बावजूद हालात नहीं सुधरे हैं। कई जगह मेडिकल जांच निजी लैब से कराई जा रही है, जिनकी रिपोर्ट संदेहास्पद है। ओएचसी मानकों के अनुरूप नहीं, पूर्णकालिक योग्य डॉक्टर नियुक्त नहीं हैं। एम्बुलेंस की लॉगबुक अपडेट नहीं है। श्रमिकों में सुनने की क्षमता की समस्या पाई गई, जबकि रिपोर्ट सामान्य बताई गई थी हाईकोर्ट का सख्त रुख हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल दस्तावेज जमा कर देना पर्याप्त नहीं है। जिन उद्योगों ने पैरा-वाइज जवाब दाखिल नहीं किया है, उन्हें नया शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि, कोर्ट कमिश्नर दोबारा निरीक्षण कर रिपोर्ट दें। सुधार कार्यों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जाए। जिन उद्योगों में कमी पाई गई है, वहां और सुधार आवश्यक हैं। फर्जी रिपोर्ट पर चिंता, राज्य को दिए सुझाव कोर्ट कमिश्नरों ने बताया कि कई निजी डायग्नोस्टिक सेंटर साइक्लोस्टाइल (कॉपी-पेस्ट) रिपोर्ट दे रहे हैं, जो अविश्वसनीय हैं। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि, विश्वसनीय डायग्नोस्टिक सेंटर को एम्पैनल किया जाए। मजदूरों के लिए यूनिक मेडिकल आईडी (आधार जैसी) व्यवस्था पर विचार किया जाए। बार-बार नौकरी बदलने वाले श्रमिकों की मेडिकल जांच प्रणाली को मजबूत किया जाए। कोर्ट कमिश्नरों के लिए मानदेय हाईकोर्ट ने कोर्ट कमिश्नरों के कार्य की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि, प्रत्येक संयंत्र निरीक्षण के लिए 2000 प्रति प्लांट भुगतान किया जाए। पूर्व में लंबित भुगतान भी दो सप्ताह में किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा निदेशक तथा संबंधित सभी अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए हैं। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 07 फरवरी 2026