आम आदमी को राहत... फल, तेल और ड्राई फ्रूट्स होंगे सस्ते नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक युद्ध की आहट अब एक ऐतिहासिक सौदा वार्ता में बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2 फरवरी को हुई सफल वार्ता के बाद, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क (टैरिफ) को पूरी तरह हटाने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश शनिवार से प्रभावी हो गई है। हालांकि, इस बड़ी राहत के साथ व्हाइट हाउस ने एक स्पष्ट चेतावनी भी जुड़ी रखी है। यदि भारत रूस से तेल का प्रत्यक्ष या परोक्ष आयात दोबारा शुरू करता है, तो यह भारी शुल्क फिर से लगा दिया जाएगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता निर्यात को बढ़ावा देगा। गोयल का यह बयान भारत और अमेरिका द्वारा व्यापार समझौते पर संयुक्त बयान जारी करने के बाद आया है, जिस पर आने वाले दिनों में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य को सामने रखकर दोनों देशों के संबंधों को देखते हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते की चर्चा की थी उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हमारे निर्यातकों के लिए अवसर खुलते हैं। जिस प्रकार से हमारे किसानों के हितों का संरक्षण किया गया है, किसानों, डेयरी का पूर्णत: संरक्षण किया गया है। इस डील का देश के कोने कोने में स्वागत हुआ है। इन चीजों के घटेंगे दाम अमेरिका से आने वाली मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्राई फ्रूट्स, सोयाबीन तेल और अमेरिकी शराब सस्ती होगी। भारत ने इन उत्पादों की राह में आने वाली व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की सहमति दी है। भारतीय उद्योगों को बंपर फायदा भारत के ऑटोमोबाइल, विमानन पुर्जे, जेनेरिक दवाइयां और रत्न-आभूषण क्षेत्र को सबसे ज्यादा लाभ होगा। अमेरिका इन उत्पादों पर से अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया है। इसके बदले, भारतीय ऑटोमोबाइल पुर्जों को अमेरिकी बाजार में विशेष रियायती कोटा मिलेगा। भारतीय किसानों के लिए राहत सरकार ने स्पष्ट किया है कि गेहूं, चावल, दूध, पनीर और केला जैसे पारंपरिक कृषि उत्पादों के आयात को मंजूरी नहीं दी गई है। अत: भारतीय किसानों को अमेरिकी प्रतिस्पर्धा से डरने की जरूरत नहीं है। पशुपालन क्षेत्र के लिए गेमचेंजर साबित होगी डील भारत में चारे की भारी किल्लत को देखते हुए सरकार ने अमेरिकी पशु चारे के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 75 प्रतिशत पशुपालक चारे की कमी से जूझ रहे हैं। अब अमेरिका से लाल ज्वार और इथेनॉल के बाद बचा हुआ अनाज (पशु आहार के लिए) आयात किया जाएगा, जिससे डेयरी उद्योग की लागत घटेगी। 500 अरब डॉलर की खरीदारी का लक्ष्य भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान पुर्जे, कीमती धातुएं और कोकिंग कोल खरीदने को तैयार हुआ है। इससे अमेरिका से होने वाला आयात दोगुने से भी ज्यादा बढ़ जाएगा। साथ ही, डेटा सेंटर के लिए जरूरी जीपीयू और उन्नत तकनीकी उत्पादों में भी दोनों देश सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णायक नेतृत्व में यह ढांचा तैयार हुआ है, जिससे भारतीय निर्यातकों को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे रूस्रूश्व, किसान और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।- पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्यात क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते और रसायनों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। हालांकि यह 2025 की दरों से थोड़ा ज्यादा है, लेकिन वियतनाम, चीन और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले यह दर कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिलेगी। विनोद उपाध्याय / 07 फरवरी, 2026