राष्ट्रीय
07-Feb-2026
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:: कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी मामला : सुप्रीम कोर्ट की दो हफ्ते की मोहलत समाप्त होने से पहले दी सफाई :: इंदौर (ईएमएस)। सशस्त्र बल की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा उनके विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी पर निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को दी गई दो सप्ताह की समय-सीमा (डेडलाइन) समाप्त होने से ठीक पहले, शाह ने शनिवार को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने अपने विवादित वक्तव्य को देशभक्ति के उत्साह और क्षणिक आवेग का परिणाम बताया। इंदौर की रेसीडेंसी कोठी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए कहा, मेरा इरादा कभी भी किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी वर्ग को ठेस पहुँचाने का नहीं था। कभी-कभी भावनाएं शब्दों की मर्यादा लांघ जाती हैं। उस समय मेरी जुबान मेरे मन के भावों का साथ नहीं दे सकी। :: ऑपरेशन सिंदूर और विवाद की जड़ :: यह पूरा विवाद मई 2025 का है, जब इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक सभा के दौरान विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। कर्नल कुरैशी उस समय राष्ट्रीय चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने सीमा पार आतंकी बुनियादी ढांचे के खिलाफ भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया ब्रीफिंग की थी। मंत्री के संबोधन का वीडियो वायरल होने के बाद सेना और नागरिक समाज में तीव्र आक्रोश देखा गया था। :: अदालती सख्ती और राजनीतिक दबाव :: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए मंत्री की भाषा को अमर्यादित और अशोभनीय करार दिया था। न्यायालय के आदेश पर मानपुर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। - धारा 152 : भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य। - धारा 196(1)(b) : विभिन्न समूहों के बीच विद्वेष को बढ़ावा देना। - धारा 197(1)(c) : राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन लगाना। अब 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को दिए गए दो सप्ताह के अल्टीमेटम के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्ष (कांग्रेस) लगातार शाह के इस्तीफे और कैबिनेट से निष्कासन की मांग कर रहा है। :: आत्ममंथन किया है, दोबारा नहीं होगी गलती :: अपने स्पष्टीकरण में विजय शाह भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, मैंने आत्ममंथन किया है और इस घटना से बड़ा सबक सीखा है। मैं अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूँ और भविष्य में अपनी वाणी पर पूर्ण नियंत्रण रखने का संकल्प लेता हूँ। मैं उन सभी नागरिकों और विशेषकर भारतीय सेना से पुनः क्षमा प्रार्थी हूँ, जिन्हें मेरी बातों से कष्ट पहुँचा है। :: सरकार के पाले में गेंद :: कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्री की बार-बार मांगी गई माफी अदालती कार्यवाही और अभियोजन की मंजूरी से बचने का एक प्रयास हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन अब सरकार के लिए अग्निपरीक्षा की घड़ी है। क्या मुख्यमंत्री अपने कैबिनेट सहयोगी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की हरी झंडी देंगे या इस माफीनामे को आधार बनाकर बीच का रास्ता निकाला जाएगा, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। प्रकाश/07 फरवरी 2026