काठमांडू (ईएमएस)। भारत-नेपाल के बीच कानूनी सहयोग को लेकर एक अहम और लंबे समय से लंबित समझौता अब अंतिम पायदान पर है। दोनों देशों ने आपराधिक मामलों में आपसी सहयोग के लिए म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस (एमएलए) समझौते का मसौदा तैयार किया है और अब केवल हस्ताक्षर की तारीख तय होना बाकी है। यह समझौता उस समय में सामने आया है जब नेपाल में मार्च में चुनाव प्रस्तावित हैं, जिससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस पर चुनाव से पहले साइन हो सकते हैं या फिर बाद में। दरअसल समझौते को लेकर सहमति जुलाई 2024 में नई दिल्ली में हुई गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कई वर्षों तक चली जटिल बातचीत के बाद दोनों देश इस बिंदु पर पहुंचे हैं, जो इस करार की संवेदनशीलता और महत्व को दिखाता है। एमएलए समझौते का उद्देश्य ट्रांसनेशनल अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटना है और इसके तहत दोनों देशों की कानूनी व जांच एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने, सबूतों के आदान-प्रदान, अभियोजन में सहयोग और आपराधिक जांच में बेहतर समन्वय को संस्थागत रूप दिया जाएगा। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है और दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा एक-दूसरे के यहां आ-जा सकते हैं इसके बाद में आतंकवाद, मानव तस्करी, साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य सीमा-पार अपराधों से निपटना दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। खास बात यह है कि भारत और नेपाल के बीच अब तक कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, जिसके कारण अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने में कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें आती रही हैं। एमएलए समझौता इन बाधाओं को काफी हद तक कम करने में मददगार माना जा रहा है। समझौते के तहत जांच एजेंसियों को संदिग्धों के बयान दर्ज करने, अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने, सबूत इकट्ठा करने और अपराधियों का पता लगाने में आपसी सहयोग का कानूनी आधार मिलेगा। नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट के अनुसार, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली में इस समझौते से जुड़ी सभी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर चुनाव से पहले हों या बाद में। विदेश मंत्रालय के एक नेपाली अधिकारी ने बताया कि इस पर विचार-विमर्श जारी है। पहले विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान समझौते पर साइन होने की संभावना थी, लेकिन यात्रा टल गई। यदि चुनाव से पहले सहमति बनती है, तब नेपाल की ओर से कानून मंत्री अनिल सिन्हा ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। आशीष दुबे / 09 फरवरी 2026