अंतर्राष्ट्रीय
09-Feb-2026


ब्रिटिश पीएम की कुर्सी जाने का खतरा लंदन(ईएमएस)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार मुश्किल में फंस गई है। एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद ने इतना तूल पकड़ लिया कि उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा। मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था। मैकस्वीनी ने कहा कि यह नियुक्ति गलत थी। मैकस्वीनी ने माना कि उन्हें पता था कि मंडेलसन ने जेफ्री एपस्टीन का जेल जाने के बाद भी समर्थन किया था। मंडेलसन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी रहते हुए एपस्टीन को मार्केट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शेयर की थी। मैकस्वीनी ने कहा कि इस फैसले से पार्टी, देश और राजनीति पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। वहीं विपक्ष का कहना है पीएम स्टार्मर को मामले की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देना चाहिए। मैकस्वीनी को ब्रिटिश पीएम का दिमाग कहा जाता है मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे मजबूत सहारा माना जाता था। उन्हें प्रधानमंत्री का दिमाग कहा जाता है और सत्ता तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उनके जाने के बाद लेबर पार्टी के सांसद पूछ रहे हैं कि अब स्टार्मर कितने दिन टिक पाएंगे। पार्टी के वामपंथी धड़े ने सीधे प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है। लेबर पार्टी के पूर्व कैंपेन प्रमुख जॉन ट्रिकेट ने कहा कि जिम्मेदारी ऊपर तक जाती है। सांसद ब्रायन लीशमैन ने कहा कि पार्टी की दिशा बदलनी है और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री से होनी चाहिए। सांसद किम जॉनसन ने माना कि स्टार्मर के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया है, जबकि रैचेल मास्केल ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। विनोद उपाध्याय / 09 फरवरी, 2026