क्षेत्रीय
09-Feb-2026
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रायपुर (ईएमएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब अमित शाह दबाव में थे और तब कुछ और बोलते थे, जबकि आज सत्ता बदलते ही उनके बयान पूरी तरह बदल गए हैं। अब लगता है कि वे खुलकर बोल रहे हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि वर्ष 2022 में स्वयं अमित शाह छत्तीसगढ़ सरकार के कामकाज की प्रशंसा कर चुके हैं। उन्होंने 23 अगस्त 2022 को अखबारों और टीवी चैनलों में कहा था कि “छत्तीसगढ़ की सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए अच्छा काम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि तब अमित शाह सही थे या आज सही हैं? उन्होंने यह भी याद दिलाया कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिसंबर 2022 में लोकसभा में आधिकारिक रूप से बताया था कि छत्तीसगढ़ में 2018 की तुलना में 2022 तक नक्सल घटनाओं में 36 प्रतिशत और नक्सली हिंसा से होने वाली मौतों में 60 प्रतिशत की कमी आई है। भूपेश बघेल ने कहा कि गृह मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह के दोहरे बयान पद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद विश्वास, विकास और सुरक्षा के मूल मंत्र पर काम किया गया, जिसके परिणामस्वरूप नक्सलवादी घटनाओं में लगातार कमी आई। उन्होंने बताया कि दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, पहुंच मार्ग बनाए गए, अबूझमाड़ में दो पुलों का निर्माण हुआ, 300 से अधिक स्कूल खोले गए, राशन दुकानें और अस्पताल शुरू किए गए तथा 67 से अधिक वनोपजों की खरीदी की गई। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से सरकार और सुरक्षा बलों के प्रति जनता का भरोसा बढ़ा और 600 से अधिक गांव नक्सल मुक्त हुए। नक्सली गतिविधियां सिमटकर केवल बीजापुर के कुछ ब्लॉकों और अबूझमाड़ क्षेत्र तक सीमित रह गई थीं। अमित शाह द्वारा बस्तर के लिए जारी किए गए रोडमैप पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में अमित शाह दो बार बस्तर आए थे। एक दौरे में वे स्वयं उनके साथ थे और दूसरे दौरे में अमित शाह सुकमा के एक कैंप में रुके थे, जहां उन्होंने स्कूल, राशन दुकान और अन्य व्यवस्थाओं को खुद देखा था। भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में भी घर-घर राशन पहुंचाया, लोगों को वनाधिकार पट्टे दिए, आंगनबाड़ियां खोलीं—ये सभी काम पहले ही किए जा चुके हैं, जबकि वर्तमान सरकार अब भी सिर्फ रोडमैप बनाने तक सीमित है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अमित शाह स्वयं सहकारिता मंत्री भी हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार सहकारिता व्यवस्था को कमजोर करने पर तुली हुई है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदेश सरकार ने ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा, तो फिर सहकारी समितियां किसानों से कर्ज की वसूली कैसे करेंगी? उन्होंने कहा कि इसका जवाब अमित शाह को देना चाहिए। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/9 फरवरी 2026