ज़रा हटके
10-Feb-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका का कुख्यात यौन अपराधी अरबपति जेफरी एपस्टीन को लेकर फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि एपस्टीन को कथित तौर पर पूर्व इजरायली प्रधानमंत्री एहुद बराक के तहत जासूस के रूप में ट्रेनिंग दी गई थी। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर कहा है कि एपस्टीन का इजरायल के लिए काम करने का कोई सबूत नहीं है। यह दस्तावेज एफबीआई की एक गोपनीय सूत्र रिपोर्ट का हिस्सा बताया जा रहा है। इसमें अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया पर विदेशी प्रभाव से जुड़ी खुफिया जानकारी दर्ज थी, लेकिन सूत्र ने एपस्टीन से जुड़े कई अन्य दावे भी साझा किए। रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्र ने हार्वर्ड लॉ प्रोफेसर एलन डर्शोविट्ज और एपस्टीन के बीच हुई फोन कॉल की बातें नोट कीं और कहा कि इन बातचीत की जानकारी इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद तक पहुंचाई जाती थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि सूत्र को सुनाई गई बातचीत के आधार पर यह धारणा बनी कि एपस्टीन मोसाद का सहयोगी एजेंट हो सकता है। इसी दौरान कथित तौर पर कहा गया कि एपस्टीन अमेरिकी और सहयोगी देशों की खुफिया एजेंसियों से जुड़ा हुआ था। हालांकि यह सभी दावे एक ही सूत्र पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दस्तावेज में अन्य विवादित आरोप भी शामिल हैं। इसमें हार्वर्ड लॉ प्रोफेसर डर्शोविट्ज के मोसाद से संबंध होने का दावा, सिलिकॉन वैली की एक वेंचर फर्म पर तकनीक चोरी के आरोप, और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के परिवार के इजरायल से गहरे रिश्तों का जिक्र है। लेकिन इन आरोपों का भी कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। दूसरी ओर एपस्टीन और बराक के बीच रिश्तों को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। दोनों के बीच लंबे समय तक संपर्क रहा और खुद बराक ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे कई बार एपस्टीन से मिले थे, हालांकि उन्होंने किसी भी गलत काम से इंकार किया। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रतिक्रिया देकर पीएम नेतन्याहू ने कहा कि एपस्टीन और बराक के बीच करीबी संबंध होने का मतलब यह नहीं कि एपस्टीन इजरायल के लिए काम करता था। उन्होंने बराक पर राजनीतिक हमला कर आरोप लगाया कि वे लंबे समय से उनकी सरकार को कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं। कुल मिलाकर, एपस्टीन को जासूस बताने वाला दावा अभी तक केवल खुफिया सूत्र की रिपोर्ट तक सीमित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जबकि इजरायली सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। आशीष/ईएमएस 10 फरवरी 2026