ज़रा हटके
10-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आजकल कम उम्र में ही थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में कठिनाई और रक्त संचार की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हैल्थ एक्सपर्ट की माने तो शरीर में ऊर्जा के असंतुलन के कारण ये समस्याएं और अधिक जटिल हो जाती हैं। ऐसे में योग और हस्त मुद्राओं जैसी प्राचीन विधियां शरीर और मन को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं में से एक है गरुड़ मुद्रा, जो वायु तत्व को नियंत्रित कर ऊर्जा और सक्रियता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, जब शरीर में वायु तत्व असंतुलित होता है, तो व्यक्ति जल्दी थकने लगता है, उसका मन अशांत रहता है और शरीर सुस्त हो जाता है। गरुड़ मुद्रा इस असंतुलन को दूर करने में प्रभावी मानी जाती है। इसका नियमित अभ्यास शरीर की सक्रियता बढ़ाने के साथ मानसिक स्थिरता लाने में मदद करता है। ऑफिस में दिनभर बैठकर काम करने वालों के लिए यह मुद्रा बेहद उपयोगी है, क्योंकि यह शरीर में रक्त संचार में सुधार करती है। बेहतर रक्त प्रवाह से हाथ-पैरों में ठंडक, सुन्नपन और कमजोरी जैसी समस्याएं कम होती हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर के अंगों तक पोषण बेहतर ढंग से पहुंचता है, जिससे व्यक्ति अधिक चुस्त और ऊर्जावान महसूस करता है। महिलाओं के स्वास्थ्य में भी गरुड़ मुद्रा को बहुत लाभकारी बताया गया है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में यह मुद्रा राहत प्रदान कर सकती है। ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने के कारण असहजता और मनोदशा में उतार-चढ़ाव भी कम होता है। साथ ही, यह सांस से जुड़ी हल्की समस्याओं में भी लाभ पहुंचाती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है। मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में गरुड़ मुद्रा का प्रभाव उल्लेखनीय है। जिन लोगों का मूड अचानक बदल जाता है, जिन्हें तुरंत गुस्सा आता है या जो भीतर ही भीतर बेचैनी महसूस करते हैं, उनके लिए यह मुद्रा विशेष रूप से लाभकारी है। इसका नियमित अभ्यास मन को शांत करता है, भय और बेचैनी को कम करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है। इससे व्यक्ति अधिक अनुशासित और स्थिर महसूस करने लगता है, जो दैनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्रा का अभ्यास सुबह के समय करना सबसे अच्छा माना गया है, क्योंकि उस समय मन शांत रहता है और ध्यान केंद्रित करना आसान होता है। प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अभ्यास पर्याप्त है। इसके लिए किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठें, रीढ़ और गर्दन सीधी रखें। दोनों हथेलियों को ऊपर लाएं, दाहिने हाथ को बाएं हाथ के ऊपर रखते हुए अंगूठों को फंसाएं। आंखें बंद करके सामान्य गति से सांस लें और ध्यान केंद्रित करें। सुदामा/ईएमएस 10 फरवरी 2026