नई दिल्ली (ईएमएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में प्राकृतिक दिनचर्या अपनाना शरीर और मन दोनों के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है। यह कोई कठिन नियमों वाला तरीका नहीं है, बल्कि प्रकृति की लय और शरीर की आवश्यकताओं के अनुरूप जीवन जीने का सरल तरीका है। प्राकृतिक दिनचर्या की शुरुआत सुबह से होती है। सूरज उगने से पहले उठना तन और मन के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इस समय वातावरण शांत और स्वच्छ होता है, जिससे मन एकाग्र रहता है। सुबह टहलना, योग, प्राणायाम या ध्यान करना पूरे दिन के लिए ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करता है। यह समय खुद से जुड़ने और दिन की योजनाओं को व्यवस्थित करने के लिए भी सर्वोत्तम होता है। शरीर की प्राकृतिक जरूरतों का सम्मान करना भी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। भूख लगे तो खाना, नींद आए तो सोना, और शौच-मूत्र की प्रक्रिया को नजरअंदाज न करना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। छोटी-छोटी चीजें जैसे इन्हें बार-बार टालना, लंबे समय में गंभीर परेशानियों का कारण बन सकती हैं। साथ ही साफ-सफाई पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। रोजाना सुबह और रात दांत साफ करना, जीभ की सफाई, नहाना और स्वच्छ कपड़े पहनना न केवल शरीर को स्वस्थ बनाए रखते हैं, बल्कि मन को भी तरोताजा रखते हैं। हल्की तेल मालिश करने से शरीर की थकान दूर होती है और रक्तसंचार बेहतर होता है। यह एक तरह से खुद को समय देने और शरीर को प्यार करने का सुंदर तरीका है। भोजन के मामले में प्राकृतिक दिनचर्या सादगी और संतुलन सिखाती है। समय पर और आवश्यकता अनुसार पौष्टिक भोजन करना चाहिए। अत्यधिक तला-भुना, जंक फूड या देर रात भोजन शरीर को भारी और सुस्त बना देता है। मौसम और अपनी क्षमता के अनुसार भोजन का चुनाव करना समझदारी है। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, न बहुत कम और न जरूरत से ज्यादा। शारीरिक गतिविधि और विश्राम का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। रोज थोड़ी-बहुत व्यायाम करने से शरीर मजबूत बनता है और मांसपेशियों की चुस्ती बढ़ती है। वहीं, रात में 6 से 8 घंटे की गुणवत्ता वाली नींद शरीर और दिमाग को पूरी तरह आराम देती है। दिन में बार-बार अनावश्यक रूप से सोने की आदत से बचना चाहिए, जब तक कि शरीर इसकी मांग न करे। सुदामा/ईएमएस 10 फरवरी 2026