तेहरान,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम और संप्रभुता को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश किसी भी दबाव या सैन्य धमकी के आगे नहीं झुकेगा, ऐसे धमकियां रोज आतीं हैं। और यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर बंद नहीं किया जाएगा। तेहरान में आयोजित एक हालिया फोरम के दौरान अराघची ने वैश्विक शक्तियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ईरान पर दबाव डालकर उसके रणनीतिक फैसलों को बदला नहीं जा सकता। विदेश मंत्री ने अमेरिका के साथ विश्वास की कमी को उजागर करते हुए कहा कि ईरान को वाशिंगटन की नीयत पर बहुत कम भरोसा है। उन्होंने परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिका की गंभीरता पर सवाल उठाए और स्पष्ट किया कि ईरान इस संवेदनशील मुद्दे पर अपने रणनीतिक साझेदारों, चीन और रूस के साथ निरंतर विचार-विमर्श कर रहा है। यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर अराघची ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह ईरान का संप्रभु अधिकार है और किसी भी बाहरी शक्ति को यह हक नहीं है कि वह तेहरान के व्यवहार या नीतियों को तय करे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि भले ही उन पर युद्ध थोप दिया जाए, लेकिन वे अपने परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे। अरब सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि वह इस तरह की सैन्य लामबंदी से डरने वाला नहीं है। हाल ही में ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू हुआ है, जो पिछले साल इजरायल के साथ हुए संक्षिप्त युद्ध के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक हलचल है। इन वार्ताओं में ईरान की मुख्य मांग अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना है। इसके बदले में ईरान कुछ ऐसे कदम उठाने को तैयार है जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भरोसा जीता जा सके, लेकिन वह अपने मुख्य परमाणु ढांचे से समझौता करने के पक्ष में नहीं है। पश्चिमी देशों और इजरायल द्वारा परमाणु हथियार बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए अराघची ने एक प्रतीकात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश जिसे परमाणु बम समझकर डर रहे हैं, वह ईरान बनाना ही नहीं चाहता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का असली परमाणु हथियार बड़ी ताकतों को ना कहने की उसकी हिम्मत और संप्रभुता है। वहीं दूसरी ओर, इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है। क्षेत्र में तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर ने विमानवाहक पोत का दौरा किया। अमेरिकी प्रशासन इसे ताकत के जरिए शांति स्थापित करने की रणनीति बता रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के तेल निर्यात से जुड़े शिपिंग नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाकर दबाव और बढ़ा दिया है। इस बीच, एक ईरानी सांसद के सनसनीखेज दावे ने हलचल मचा दी है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका ने सीमित हमलों का एक प्रस्ताव दिया था जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके ठिकानों पर कोई वास्तविक हमला हुआ, तो उसका जवाब केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा, बल्कि अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। वीरेंद्र/ईएमएस 10 फरवरी 2026