० संसद में गूंजी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की आवाज, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की प्रदेश को जियोटेक्सटाइल हब बनाने की सशक्त वकालत रायपुर (ईएमएस)। जैसे-जैसे भारत का राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) नवाचार और अनुसंधान के लिए प्राप्त 1,100 से अधिक आवेदनों के साथ गति पकड़ रहा है, इस तकनीक के स्थानीयकरण को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। मंगलवार को लोकसभा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एक रणनीतिक बदलाव की वकालत की और छत्तीसगढ़ के विकास और स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। श्री अग्रवाल ने मांग की कि, छत्तीसगढ़ जैसे उच्च क्षमता वाले राज्यों को उनकी व्यापक बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करने के लिए जियोटेक्सटाइल उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। श्री बृजमोह। अग्रवाल ने वस्त्र मंत्रालय से एनटीटीएम (NTTM) के तहत आवंटित 1,480 करोड़ रुपये के कोष के वास्तविक उपयोग पर सवाल किए। साथ ही उन्होंने मांग की कि मिशन की अप्रयुक्त धनराशि को एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योगिकी अपनाने और क्षेत्रीय परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए पुनः प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जाए। उन्होंने दिसंबर 2025 तक मिशन के तहत जारी और उपयोग की गई धनराशि के बीच के अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा, ताकि विकास की गति में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जियोटेक्सटाइल के स्वदेशी उत्पादन के लिए विशेष सहायता की आवश्यकता पर बल दिया। सांसद श्री अग्रवाल के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि मिशन के तहत अब तक 1100 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं और 506.73 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। मिशन के तहत विशेष रूप से जियोटेक्सटाइल को समर्पित 22 अनुसंधान परियोजनाओं को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर खनन और सड़क निर्माण की परियोजनाएं संचालित हैं। इन क्षेत्रों में जियोटेक्सटाइल (Geotextiles) की भारी मांग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को स्वदेशी उत्पादन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता दी जाती है, तो इससे न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य में रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, भारत की विविधता के लिए विकेंद्रीकृत औद्योगिक नियोजन की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ जैसा राज्य, जो अपनी खदानों के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे को शक्ति प्रदान करता है, उसे केवल तकनीकी वस्त्रों का उपभोक्ता नहीं होना चाहिए; उसे एक उत्पादक होना चाहिए। इस अंतर को पाटने के लिए, राज्यों को तकनीकी वस्त्रों के लिए समर्पित ऐसे और अधिक औद्योगिक क्लस्टरों की आवश्यकता है, जहाँ स्थानीय MSMEs को स्थानीय बुनियादी ढांचे की मांगों को पूरा करने के लिए तकनीक और फंड के साथ सशक्त बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि, NTTM के प्रचार और बाजार विकास घटक का लाभ उठाकर, राज्य के पास जियोटेक्सटाइल के खरीदार से विनिर्माण पावरहाउस बनने का एक स्पष्ट रोडमैप है, जो स्थानीय औद्योगिक उत्पादन को राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के साथ जोड़ता है। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/10 फरवरी 2026