क्षेत्रीय
10-Feb-2026
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बालाघाट (ईएमएस). प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालाघाट के इतिहास विभाग द्वारा 10 फरवरी को लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार मराठे के संरक्षण एवं आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. सीमा श्रीवास्तव के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार मराठे ने लैंगिक संवेदनशीलता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव की मानसिकता और सोच के स्तर पर समाप्त करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्यस्थलों पर बेटियों के साथ भेदभाव आज भी देखने को मिलता है, जो समाज के लिए चिंताजनक है। इस स्थिति को बदलने के लिए समझदारी, समान दृष्टिकोण और रुढ़ीवादी मानसिकता में सुधार आवश्यक है। वेबिनार की मुख्य वक्ता सरोकार एनजीओ भोपाल की संस्थापक एवं सचिव कुमुद सिंह ने बताया कि जेंडर एक सामाजिक-सांस्कृतिक अवधारणा है, जो समय के साथ बदलती रहती है। उन्होंने महिलाओं के श्रम को महत्व देने, रंगभेद और लिंगभेद को समाप्त करने तथा शिक्षा के माध्यम से लैंगिक समानता स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान की शुरुआत हम भारत के लोग से होती है, जो किसी भी प्रकार के लिंग भेदभाव को स्वीकार नहीं करता। बिना लैंगिक समानता के गुणवत्तापूर्ण समाज का निर्माण संभव नहीं है। दूसरे मुख्य वक्ता यशोदा गल्र्स आट्र्स एंड कॉमर्स कॉलेज नागपुर के प्राध्यापक डॉ. सूर्यकांत कापसीकर ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में लैंगिक समानता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में मातृसत्तात्मक समाज व्यवस्था थी और स्त्री-पुरुष में भेदभाव नहीं था। समय के साथ समाज में विषमता आई, जिसे दूर करने के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों ने महत्वपूर्ण प्रयास किए। उन्होंने विद्यार्थियों और समाज को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जागरूक करने तथा जमीनी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. पीआर कातुलकर, डॉ. सरिता खोब्रागड़े, प्रो. किशोरी लाल अहिरवार, डॉ. योगिता पटले, डॉ. सुप्रिया बिसेन, प्रो. रविशंकर मड़ावी और अतुल मेश्राम सहित अनेक प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। वेबिनार का मंच संचालन प्रो. प्राशु गौतम ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. रचना कोरी द्वारा किया गया। भानेश साकुरे / 10 फरवरी 2026