-हर खरीदारी पूरी तरह होती है रिकॉर्ड, हर ग्राहक के लिए अलग मासिक कोटा तय रियाद,(ईएमएस)। सऊदी अरब ने 1952 में शराब की बिक्री पर पूरी तरह बैन कर दिया गया था। लंबे समय तक यह कानून सख्ती से लागू रहा और शराब सिर्फ प्राइवेट पार्टियों, डिप्लोमैटिक मिशनों और ब्लैक मार्केट के जरिए ही मिलती थी। अब पहली बार सरकार ने चुनिंदा विदेशी रेजिडेंट्स के लिए शराब खरीदने की अनुमति दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में एक गुप्त शराब स्टोर खोला गया है, जिसकी इमारत पर कोई बोर्ड या नाम नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक दुकान का पता न तो ऑनलाइन उपलब्ध है और न आधिकारिक रूप से घोषित किया गया है। यह सऊदी की सबसे सुरक्षित और विदेशी-प्रधान लोकेशन में है, जहां एंट्री बेहद नियंत्रित और सीमित रखी गई है। स्टोर में प्रवेश से पहले ग्राहकों के मोबाइल फोन को सील बैग में बंद किया जाता है, ताकि कोई फोटो या वीडियो न बना सके। एंट्री पर दो-स्तरीय सुरक्षा जांच होती है। अंदर नियमित सुपरमार्केट जैसा माहौल है, लेकिन हर खरीदारी पूरी तरह रिकॉर्ड होती है और हर ग्राहक के लिए अलग मासिक कोटा तय किया जाता है। सऊदी अरब ने बिना किसी औपचारिक घोषणा के अमीर विदेशी रेजिडेंट्स को शराब खरीदने की अनुमति दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश ने करीब 73 साल पहले शराब की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाया था, और अब पहली बार इसमें सीमित ढील दी जा रही है। सऊदी अरब में शराब की पहली अधिकृत दुकान जनवरी 2024 में रियाद में शुरू की गई थी। शुरुआत में इस स्टोर में खरीदारी का अधिकार केवल गैर-मुस्लिम डिप्लोमैट्स तक सीमित था, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के अंत में चुपचाप लागू किए गए नए नियमों के बाद अब अमीर, गैर-मुस्लिम विदेशी निवासी भी यहां से बीयर, वाइन और स्पिरिट खरीद सकते हैं। सऊदी सरकार ने शराब खरीदने की अनुमति सिर्फ ग़ैर-मुस्लिम विदेशी रेजिडेंट्स को दी है। खास योग्यता पूरी करने वाले अमीर विदेशी भी खरीद सकते हैं। मुस्लिम विदेशी, सऊदी नागरिक और सामान्य श्रेणी के एक्सपैट्स इस नियम से पूरी तरह बाहर रखे गए हैं। जो विदेशी प्रीमियम रेसीडेंसी परमिट लेते हैं, उन्हें सबसे पहले एंट्री मिलती है। यह परमिट काफी महंगा है और इसकी सालाना फीस 100,000 रियाल है। आमतौर पर ये परमिट विदेशी निवेशकों, वरिष्ठ कंपनी अधिकारियों और उच्च कौशल वाले प्रोफेशनल्स को मिलता है। यह अनुमति सीधे शराब खरीदने की पात्रता बन जाती है। जिन विदेशी कर्मचारियों की मासिक कमाई 50,000 रियाल से ज्यादा है, उन्हें भी शराब खरीदने की अनुमति मिलती है। ऐसे लोगों को अपनी रेजिडेंट आईडी के साथ कंपनी की तरफ से जारी सैलरी सर्टिफिकेट दिखाना होता है। यह नियम तय करता है कि शराब सिर्फ सीमित और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक ही रहे। विश्लेषकों के मुताबिक सऊदी सरकार जानबूझकर धीमी और सावधान रणनीति अपना रही है। यह एक तरह का टेस्टिंग स्टेज है। अगर समाज और सिस्टम इसे स्वीकार करता है, तभी आगे बढ़ाया जाएगा। यह नीति अभी भी बेहद सीमित है। मुस्लिम विदेशी रेजिडेंट्स और सभी टूरिस्ट इस स्टोर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। सऊदी नागरिकों के लिए तो यह पूरी तरह बैन है। धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इस बदलाव को सार्वजनिक स्तर पर नहीं बढ़ा रही। भविष्य में पर्यटन के लिए नियम ढीले होने की संभावना जरूर जताई जा रही है। सिराज/ईएमएस 11 फरवरी 2026