लंदन (ईएमएस)। दुनिया के लगभग 40 से 50 देशों में दूध वाली चाय की लोकप्रियता है, हालांकि हर देश में इसे बनाने का तरीका, स्वाद और नाम अलग-अलग है। दुनिया भर में चाय के अलग-अलग रूप इस बात का सबूत हैं कि यह सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि संस्कृति, आदत और स्वाद का अनोखा संगम है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई देशों में चाय का मतलब ही दूध वाली चाय होता है। दुनिया भर में यहां की मसाला चाय और कड़क दूध पत्ती मशहूर है। सुबह हो या शाम, छोटे-छोटे ढाबों से लेकर घरों तक इसकी खुशबू लोगों के दिन की शुरुआत का हिस्सा बन चुकी है। एशिया में ताइवान ने दुनिया को बबल टी दी, जो आज युवाओं की पहली पसंद बन चुकी है। चीन के हांगकांग में ‘हांगकांग स्टाइल मिल्क टी’ खास तौर पर कंडेंस्ड मिल्क और मजबूत चाय के मिश्रण के लिए प्रसिद्ध है। थाईलैंड की ‘थाई मिल्क टी’ अपने चमकीले नारंगी रंग और मीठे स्वाद से पहचानी जाती है। मलेशिया और सिंगापुर की तेह तारिक भी खास है, जिसमें चाय को एक बर्तन से दूसरे में ऊंचाई से डालकर झागदार बनाया जाता है। वहीं मंगोलिया की पारंपरिक चाय ‘सूते त्साई’ नमकीन होती है और इसमें कभी-कभी मक्खन भी मिलाया जाता है। यूरोप में ब्रिटेन दूध वाली चाय के प्रति अपने प्रेम के लिए जाना जाता है। यहां लोग काली चाय में थोड़ा सा दूध डालकर पीते हैं। आयरलैंड में प्रति व्यक्ति चाय की खपत दुनिया में सबसे अधिक है और यहां भी दूध वाली चाय खूब पसंद की जाती है। अरब देशों में यमन की अदनी चाय अपनी खुशबू और दूध-मसालों के स्वाद के लिए लोकप्रिय है। हालांकि तुर्की, जो दुनिया के सबसे ज्यादा चाय पीने वाले देशों में शामिल है, वहां लोग चाय में बिल्कुल दूध नहीं डालते। भारत में भी कई अनोखी चायें मिलती हैं। कश्मीर की नून चाय, जिसे गुलाबी चाय भी कहा जाता है, अपने रंग और स्वाद से सबसे अलग है। यह मीठी नहीं बल्कि नमकीन होती है और इसका रंग गहरा गुलाबी होता है। इसे बनने में समय लगता है और इसमें खास तरह की हरी पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह चाय सर्दियों में शरीर को गर्म रखती है और गैस जैसी दिक्कतों को भी कम करती है। हैदराबाद की ईरानी चाय भी खास है, जिसे बनाने में दूध और चाय को अलग-अलग पकाया जाता है। दूध को इतना उबाला जाता है कि वह गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा हो जाए, फिर उसे चाय के काढ़े में मिलाया जाता है। सुदामा/ईएमएस 11 फरवरी 2026