मस्कट(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ओमान में ईरान के साथ हुई हालिया बातचीत काफी अच्छी रही है। शुक्रवार को ओमान की मध्यस्थता में हुई यह बैठक पिछले साल ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक और गंभीर चर्चा थी। ट्रंप के अनुसार, ईरान एक नए समझौते के लिए उत्सुक दिख रहा है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते की शर्तें अमेरिका के हित में कितनी सटीक बैठती हैं। ओमान में हुई इस परोक्ष वार्ता में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हुए। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर भी सक्रिय भूमिका में नजर आए। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने दोनों पक्षों के बीच सेतु का काम किया। हालांकि दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने सीधे तौर पर लंबी चर्चा नहीं की, लेकिन विदेश मंत्री अराघची ने पुष्टि की कि अमेरिकी दल के साथ उनका सीमित सीधा संपर्क हुआ और दोनों पक्षों के बीच शिष्टाचार स्वरूप हाथ भी मिलाए गए। दोनों पक्ष अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व से परामर्श करने के बाद अगले सप्ताह फिर से मेज पर बैठने के लिए सहमत हुए हैं। इस वार्ता के बीच ईरान से आई एक खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने पिछले 37 वर्षों में पहली बार वायुसेना कमांडरों की वार्षिक बैठक में हिस्सा नहीं लिया। 1989 में सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका है जब वे इस महत्वपूर्ण सैन्य आयोजन से अनुपस्थित रहे। उनकी गैर-मौजूदगी को लेकर कूटनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसे तेहरान की बदली हुई रणनीति या संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के डर के रूप में देखा जा रहा है। बातचीत के मुख्य मुद्दों की बात करें तो ईरान ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को 60 प्रतिशत तक घटाने और इसे शांतिपूर्ण रखने की गारंटी देने को तैयार है, बशर्ते उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटा लिए जाएं। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि नया समझौता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को मिलने वाले समर्थन पर भी अंकुश लगाया जाए। फिलहाल अराघची ने साफ कर दिया है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद नहीं करेगा, जो भविष्य की बातचीत में एक बड़ा गतिरोध बन सकता है। तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ ओमान में टेबल पर बातचीत चल रही है, तो दूसरी तरफ समुद्र में अमेरिकी नौसेना का यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि वार्ता विफल होती है या ईरान हिंसा का रास्ता चुनता है, तो सैन्य विकल्प खुले हैं। जवाब में ईरान ने भी धमकी दी है कि किसी भी हमले की स्थिति में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और होर्मुज जलडमरूमध्य में वैश्विक तेल आपूर्ति को निशाना बना सकता है। फिलहाल, ओमान की यह बैठक पूर्ण युद्ध के खतरे को टालने की एक उम्मीद बनकर उभरी है। वीरेंद्र/ईएमएस 11 फरवरी 2026