क्षेत्रीय
11-Feb-2026
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महाशिवरात्रि पर 300 वर्ष बाद दुर्लभ संयोग, महाअभिषेक, पूजन का विशेष लाभ मिलेगा : डॉ. अशोक शास्त्री इस साल फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि दो दिन होने के कारण महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस संदर्भ में मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया है कि महाशिव रात्रि दिनांक 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी । हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। यह पावन पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करने और व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केवल जल अर्पित करने मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर करीब 300 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है । इस बार महाशिवरात्रि पर एकसाथ कई शुभ योग रहेंगे । सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा हैं , जिसमे शिव आराधना का विशेष महत्त्व माना गया हैं । साथ इस दिन सूर्य, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग रहेगा । इसके अलावा, सर्वार्थ सिद्ध योग, व्यतिपात योग, वरियान योग, ध्रुव योग भी रहेगा । सूर्य-बुध कुंभ राशि बुधादित्य राजयोग बनाएंगे । शुक्र-बुध लक्ष्मी नारायण राजयोग बनाएंगे । सूर्य-शुक्र शुक्रादित्य राजयोग बनाएंगे । महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र में पड़ रही है, जो भगवान शिव का प्रिय नक्षत्र भी है । डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया की भगवान शिव की पूजा के लिए इस दिन कुछ विशेष सामग्रियों का होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। पूजा के दौरान बेलपत्र, भांग, धतूरा, भस्म और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। अभिषेक के लिए गंगाजल, पंचामृत, गाय का दूध, दही, शहद तथा गन्ने का रस उपयोग में लाया जाता है। इसके अतिरिक्त पंच मेवा, इत्र, रोली, मौली, चंदन, धूप, दीपक और कपूर भी पूजा सामग्री में शामिल किए जाते हैं। साथ ही भगवान शिव के लिए वस्त्र और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने का भी विशेष महत्व है। रॉकी/11/02/2026