राज्य
12-Feb-2026
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- नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज जबलपुर (ईएमएस)। म.प्र. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने ठगी के एक आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बैतूल पुलिस से केस डायरी तलब किए जाने के बाद भी उक्त डायरी पेश न किए जाने पर गंभीर रुख अपनाते हुए बैतूल के एसपी वीरेंद्र जैन को तलब किया था। यहां एकलपीठ द्वारा न्यायालय में हाजिर हुए एसपी जैन के समक्ष बैतूल पुलिस को लगाई गई कड़ी फटकार के बाद एसपी जैन ने एकलपीठ को अवगत कराया कि इस गंभीर लापरवाही पर आमला थाने के एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है। इस बयान को नाकाफी पाते हुए न्यायालय ने राज्य के डीजीपी को कहा कि जिले के एसपी ही लोगों के जीवन और स्वतंत्रता को लेकर संजीदा नहीं हैं। अब खुद वे (डीजीपी) ही तय करें कि ऐसे मामले में आगे क्या किया जाए। हालांकि मामले में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एकलपीठ ने नौकरी लगाने के नाम पर 3 लाख की ठगी करने वाले आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इंकार कर उसकी अर्जी खारिज कर दी। उक्त अग्रिम जमानत याचिका बैतूल जिले के आमला थाने के ग्राम अंधारिया में रहने वाले प्रवीण देशमुख की ओर से दाखिल की गई थी। आवेदक पर आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से 3 लाख रुपये वसूले और न तो बेरोजगारों को नौकरी दिलाई और न ही रकम लौटाई गई, उलटे उन्हें धमकी दी गई। पीड़ितों की शिकायत पर आमला थाना पुलिस ने आरोपी प्रवीण देशमुख के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 294 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने यह अर्जी दाखिल की गई थी। उच्च न्यायालय की एकलपीठ के समक्ष मामले की पहली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को हुई थी, जब केस डायरी पेश नहीं की गई। इस पर एकलपीठ ने सकारी पक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अगली तारीख पर डायरी पेश की जाए लेकिन अगली सुनवाई में भी डायरी प्रस्तुत नहीं की गई। पुलिस के इसी रवैये को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने न केवल इसे नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया में बाधा और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद मामले में बैतूल पुलिस अधीक्षक (एसपी) वीरेंद्र जैन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। एसपी जैन ने अदालत को बताया कि 4 फरवरी को न्यायालय का पत्र मिलने के बावजूद एसएचओ ने जानबूझकर केस डायरी नहीं भेजी। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर प्रारंभिक विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इसके बाद एकलपीठ ने पूरे मामले को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के संज्ञान में लेने के निर्देश भी दिए। तो वहीं मामले में आवेदक प्रवीण देशमुख पर लगे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने कहा कि आरोपी पर स्पष्ट आरोप लगे हैं। हमारी राय में यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमे आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। इस मत के साथ एकलपीठ ने आरोपी की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। सुनील साहू / मोनिका / 12 फरवरी 2026