राज्य
12-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप से जुड़े साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खाते में 43.33 करोड़ जमा हुए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप से जुड़े बड़े साइबर फ्रॉड मामले में एक आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद शुरुआती सबूत बताते हैं कि करीब 43.33 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग गोल-मोल और परतदार लेनदेन के जरिए की गई, जो बेहद गंभीर मामला है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस गिरीश कथपालिया ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि पैसों की हेराफेरी का जटिल जाल है, जिसकी जांच अभी जारी है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे बड़े आर्थिक अपराध देश की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाते हैं। आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि उसके खाते में सिर्फ करीब 12,100 ही आए थे, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच में सामने आया है कि आरोपी की फर्म के बैंक खाते में सिर्फ छह महीने के भीतर 43.33 करोड़ जमा हुए, जो मामले को बेहद गंभीर बनाता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ इसलिए कि जांच एजेंसियों ने बैंक खाता चलाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई, आरोपी की भूमिका कम नहीं हो जाती। अदालत ने पाया कि आरोपी लेनदेन की वैधता साबित करने के लिए जीएसटी रिकॉर्ड, खरीद-फरोख्त के बिल या आयकर दस्तावेज भी पेश नहीं कर सका। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता और आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। यह मामला फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए लोगों से ठगी और बड़े पैमाने पर पैसे की हेराफेरी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी जांच अभी जारी है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/12/फरवरी/2026