महामहिम राष्ट्रपति से किसान-विरोधी शर्तें निरस्त करने की मांग देश किसानों को धोखा दे रही है भाजपा सरकार - सचिन यादव खरगोन (ईएमएस)। भारत कृषक समाज मप्र के अध्यक्ष अरूण यादव के निर्देश पर आज खरगोन में भारत कृषक समाज खरगोन के तत्वाधन मे कसरावद विधायक सचिन यादव एवं भगवानपुरा विधायक केदार सिह डाबर द्वारा द्वारा यूएस इंडिया ट्रेड डील के प्रावधानों को भारतीय किसानों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताते हुए भारत कृषक समाज जिला इकाई खरगोन एवं कांग्रेसजनो के तत्वावधान में महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन सयुक्त कलेक्टर खरगोन को सौंपा गया। ज्ञापन में केंद्र सरकार से इस व्यापार समझौते की किसान-विरोधी शर्तों को तत्काल निरस्त कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में हुआ व्यापार समझौता एकतरफा है और इससे अमेरिका को लाभ पहुंचने की संभावना है, जबकि भारतीय किसानों और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि संसद में व्यापक चर्चा के बिना इस प्रकार का करार किया जाना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। जीरो टैरिफ नीति से भारतीय कृषि पर खतरा - सचिन यादव पूर्व कृषि मंत्री ज्ञापन में उल्लेखित अनुसार मप्र के पूर्व कृषि मंत्री एवं कसरावद विधायक सचिन यादव ने कहा कि भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले उत्पादों पर अमेरिका 18 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, जो पूर्व वर्षों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक बताया गया है। वहीं अमेरिका से भारत आने वाले उत्पादों पर भारत द्वारा शून्य प्रतिशत (जीरो) टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। किसानों का कहना है कि यह असंतुलित व्यवस्था भारतीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा को असंभव बना देगी। पहले ही भारत का किसान कर्ज और आर्थिक बोझ से दबा हुआ है । वहीं अब भाजपा सराकर किसानों को धोखा देकर बर्बाद कर रही है । केंद्रीय कृषि एवं वाणिज्य मंत्रियों द्वारा कृषि क्षेत्र को पूर्ण संरक्षण दिए जाने के दावों पर प्रश्न उठाते हुए ज्ञापन में कहा गया है कि प्रत्यक्ष रूप से सोयाबीन और मक्का का आयात न होने की बात कही जा रही है, लेकिन सोया तेल और मक्के से बने डेयरी फीड ‘डीडीजी’ के आयात की अनुमति दी जा रही है। इससे भारतीय किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान होगा। भगवानपुरा विधायक केदार सिंह डाबर ने जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा यह घोषणा की गई है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार जीरो टैरिफ पर उपलब्ध होगा, जिससे अमेरिका के किसानों को लाभ मिलेगा और देश के किसान आर्थिक बोझ के तले दब जाएॅगे । भारत और अमेरिका के कृषि ढांचे की तुलना किसान संगठनों ने भारत और अमेरिका की कृषि परिस्थितियों में भारी अंतर का हवाला दिया। ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका में मात्र 2 प्रतिशत लोग कृषि से जुड़े हैं और औसत जोत लगभग 450 एकड़ प्रति किसान है, साथ ही कृषि क्षेत्र को 60 प्रतिशत से अधिक सरकारी सब्सिडी प्राप्त होती है। इसके विपरीत भारत में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है, औसत जोत 1 से 1.15 एकड़ है और कृषि को बजट का मात्र 3 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में मिलता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में भारतीय किसान अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे कृषि क्षेत्र के कमजोर होने की आशंका जताई गई है। ज्ञापन में आशंका व्यक्त की गई कि अमेरिका ने आगामी पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर (लगभग 40 लाख करोड़ रुपये) का माल भारत को निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और घरेलू उद्योग एवं कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 12 फरवरी 2026 को आयोजित धरना-प्रदर्शन का समर्थन करते हुए भारत कृषक समाज मध्यप्रदेश ने भी इस आंदोलन में भागीदारी की घोषणा की है। संगठन ने इसे किसानों के अधिकारों की रक्षा का संघर्ष बताया। ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख प्रतिनिधि इस दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक सचिन सुभाष यादव, भगवानपुरा विधायक केदार सिंह डाबर, भारत कृषक समाज जिला सचिव राजेन्द्र तिवारी,, पूर्व विधायक परसराम डण्डीर, जगदीश वानखेड़े,हबीब बेग मिर्जा, सुरेश चंदेल, आरिफ हजारी, दिलीप श्रीमाली लखन पाटीदार, नितीश आड़तीया, पियुष रघुवंशी, महेश यादव, परसराम यादव, अनिल यादव, राजेश बागदरे, गोरु पाटीदार, शाहरुख खान, छोटू यादव, प्रशांत सांवले, रविंद्र यादव, अ.सरदार भुटटो, राजेंद्र पंवार, हेमराज पाटीदार सहित आदि किसानो और कार्यकर्ताओ ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार को निर्देशित कर इस ट्रेड डील की किसान-विरोधी शर्तों को निरस्त कराया जाए। ईएमएस/ मोहने/ 12 फरवरी 2026