राज्य
12-Feb-2026


:: कलेक्टर ने धारा 163 के तहत जारी किए प्रतिबंधात्मक आदेश; नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे दर्ज होगी एफआईआर :: इंदौर (ईएमएस)।शहर में ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती शिकायतों और आमजन की शांति में खलल डालने वाले शोर को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी शिवम वर्मा ने इंदौर राजस्व सीमा में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित और नियम विरुद्ध प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत जारी यह आदेश 11 अप्रैल 2026 तक प्रभावशील रहेगा। इस अवधि में नियमों की अनदेखी करना भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा। प्रशासन की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब किसी भी उत्सव, रैली या निजी आयोजन में लाउडस्पीकर, बैंड या प्रेशर हॉर्न का उपयोग बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में अनुमति मिलने पर भी केवल दो मध्यम आकार के लाउडस्पीकर लगाने की ही छूट दी जाएगी। आदेश में साफ किया गया है कि लाउडस्पीकर किराये पर देने वाले वेंडर भी निर्धारित संख्या से अधिक उपकरण उपलब्ध नहीं कराएंगे। :: रात 10 बजे के बाद पूर्ण मौन का आदेश :: सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कलेक्टर ने रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त, सड़कों पर शोर का पर्याय बने प्रेशर हॉर्न के भंडारण और बिक्री को भी अवैध घोषित कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ध्वनि प्रदूषण के निर्धारित मानकों से बाहर जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। :: पुलिस रखेगी पैनी नजर :: आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिले के सभी थाना क्षेत्रों को सतर्क कर दिया गया है। विशेष रूप से घनी आबादी वाले इलाकों और मैरिज गार्डन्स पर नजर रखी जाएगी। यदि कोई भी आयोजक या वेंडर नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर कानूनी कार्यवाही के साथ-साथ संबंधित उपकरणों को जब्त करने की कार्यवाही भी की जा सकती है। प्रकाश/12 फरवरी 2026