ज़रा हटके
13-Feb-2026
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लंदन(ईएमएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट होम डिवाइसेज तक, हम हर जगह एआई संचालित तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या एआई केवल एक मददगार के रूप में रहेगा या भविष्य में इंसानों की जगह ले लेगा? जाने-माने एआई रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की की हालिया चेतावनी ने इस बहस को एक नया और चिंताजनक मोड़ दे दिया है। डॉ. याम्पोल्स्की का मानना है कि वह समय अब ज्यादा दूर नहीं है जब एआई इंसानों को कार्यक्षेत्र से पूरी तरह रिप्लेस कर देगा। लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और एआई सुरक्षा के विशेषज्ञ डॉ. याम्पोल्स्की ने दावा किया है कि आने वाले कुछ वर्षों में एआई इंसानों की लगभग 99 फीसदी नौकरियां खत्म कर सकता है। उनके अनुसार, वर्तमान में ऐसा कोई भी इंसानी काम नहीं दिख रहा है जिसे ऑटोमेट यानी मशीन द्वारा संचालित न किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि 2045 तक समाज एक ऐसे तकनीकी बिंदु (सिंगुलैरिटी) पर पहुंच सकता है, जहां से पीछे लौटना नामुमकिन होगा। यह बदलाव पिछले औद्योगिक क्रांतियों से बिल्कुल अलग और कहीं अधिक व्यापक होगा।डॉ. याम्पोल्स्की के मुताबिक, अगले पांच वर्षों के भीतर लगभग हर प्रकार के शारीरिक श्रम (फिजिकल लेबर) को ऑटोमेट किया जा सकता है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि हम एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ बेरोजगारी का स्तर वह नहीं होगा जो हमने पहले कभी देखा है। यह 10 प्रतिशत नहीं, बल्कि 99 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि आने वाले समय में केवल वही नौकरियां बचेंगी जहाँ मानवीय भावना या व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बहुत अमीर व्यक्ति अपनी पसंद के लिए एक इंसानी अकाउंटेंट रखना चाहे या किसी विशेष कार्य के लिए मानवीय स्पर्श की मांग करे, तो ही वे पद सुरक्षित रह पाएंगे। इसके अलावा, हस्तशिल्प और हाथ से बनी चीजों के लिए एक छोटा बाजार बना रह सकता है, क्योंकि कुछ लोग शौक के तौर पर मशीनी उत्पादों के बजाय इंसानी श्रम से बनी वस्तुओं को प्राथमिकता देंगे। साथ ही, एआई की निगरानी और इसके रेगुलेशन से जुड़ी कुछ नौकरियां भी बची रह सकती हैं। हालांकि, डॉ. याम्पोल्स्की ने यह भी जोड़ा कि लंबे समय में एआई को पूरी तरह से नियंत्रित करना शायद नामुमकिन हो जाए, लेकिन इंसानी निगरानी इस बदलाव की गति को धीमा करने में सहायक हो सकती है। यह शोध पत्र और उनके विचार भविष्य की उस धुंधली तस्वीर की ओर इशारा करते हैं, जहां तकनीकी विकास और मानवीय अस्तित्व के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी। वीरेंद्र/ईएमएस 13 फरवरी 2026