ज़रा हटके
13-Feb-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। अंतरिक्ष में बने ब्लैक होल द्वारा एक तारा को निगलने के बाद रहस्यमय रोशनी निकलना प्रारंभ हुई, वह समय के साथ और तेज होती जा रही है। इस दृश्य को देखकर वैज्ञानिक भी अचंभित है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे सुपरमैसिव ब्लैक होल का अविश्वसनीय दृश्य कैद किया है, जिसने एक तारे को निगलने के बाद ऐसी ऊर्जा छोड़नी शुरू की जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही। वैज्ञानिकों ने इस शक्तिशाली जेट को मज़ाकिया अंदाज़ में ‘जेटटी मेकजेटफेस’ नाम दिया है। यह ब्लैक होल 2018 में पहली बार चर्चा में आया था, जब इसने अपने विशाल गुरुत्वाकर्षण बल से एक तारे को टुकड़ों में बदल दिया था। आमतौर पर ऐसी घटनाएं कुछ महीनों या एक-दो साल के भीतर मंद पड़ जाती हैं, लेकिन यह ब्लैक होल इसके ठीक उलट लगातार और भी ज्यादा चमकदार और ऊर्जावान होता जा रहा है। आज यह ब्रह्मांड की सबसे चमकीली वस्तुओं में शुमार हो चुका है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन की एस्ट्रोफिजिसिस्ट यवेटे सेंडेस ने इस घटना को बेहद असामान्य बताया है। उनके अनुसार किसी खगोलीय घटना की ऊर्जा चार साल बाद भी बढ़ती रहे, यह विज्ञान के लिए एक बड़ी पहेली है। शोध के मुताबिक यह ब्लैक होल अब 2019 के मुकाबले लगभग 50 गुना ज्यादा चमक पैदा कर रहा है। वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना ‘स्टार वार्स’ के काल्पनिक ‘डेथ स्टार’ से की है, लेकिन वास्तविकता में ‘जेटटी मेकजेटफेस’ उससे खरबों गुना अधिक शक्तिशाली है। यह विस्फोटक ऊर्जा एक टाइडल डिसरप्शन इवेंट (टीडीई) का नतीजा है। जब कोई तारा किसी सुपरमैसिव ब्लैक होल के अत्यधिक करीब पहुंच जाता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण तारे को ‘स्पैगेटीफिकेशन’ प्रक्रिया में खींचकर लंबा और पतला कर देता है। तारा टूटता है और उसके अवशेष ब्लैक होल के चारों ओर घूमते हुए एक चमकदार डिस्क बनाते हैं। इसी दौरान तीव्र रेडिएशन और हाई-एनर्जी जेट बाहर की ओर फूटते हैं। एटी2018एचवायझेड नामक इस घटना में बना जेट अब तक का सबसे शक्तिशाली माना जा रहा है। हालांकि इसकी चमक पृथ्वी से 66.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक शांत गैलेक्सी से आ रही है, इसलिए किसी खतरे की आशंका नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जेट की दिशा पृथ्वी की ओर नहीं है। यदि यह सीधे हमारी ओर संकेत करता, तो यह अपनी अपार ऊर्जा के कारण ग्रहों को शुरुआती कुछ प्रकाश वर्ष की दूरी में ही नष्ट कर सकता था। ‘जेटटी मेकजेटफेस’ जैसी घटना अत्यंत दुर्लभ है। अब तक देखे गए 100 से अधिक टीडीईएस में केवल 1 प्रतिशत में ही इतना शक्तिशाली और प्रकाश की गति के करीब भागने वाला ‘रिलेटिविस्टिक जेट’ देखा गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में ‘स्क्वायर किलोमीटर एरे’ जैसे उन्नत टेलिस्कोप इस प्रकार की रहस्यमय घटनाओं को और बेहतर समझने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। खगोलविदों का अनुमान है कि इस जेट की ताकत अब भी बढ़ रही है और संभव है कि 2027 तक यह ऊर्जा अपने चरम पर पहुंच जाए। इसके बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर होने की उम्मीद है। वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि शुरुआत में यह जेट काफी पतला था, लेकिन समय के साथ इसके चौड़ा होने के कारण इसकी चमक पृथ्वी तक अधिक मात्रा में पहुंच रही है। सुदामा/ईएमएस 13 फरवरी 2026