क्षेत्रीय
13-Feb-2026
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-अवैध अभिरक्षा और क्रूरता के आरोप, बाल कल्याण समिति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग सिंगरौली (मध्यप्रदेश) ईएमएस। चितरंगी क्षेत्र से सामने आया एक संवेदनशील मामला अब बाल अधिकारों और मातृत्व के प्रश्न पर गंभीर बहस खड़ा कर रहा है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी तीनों नाबालिग पुत्रियों को उससे अलग कर जबरन अपने कब्जे में रखा गया है तथा उसे बच्चों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा। पीड़िता जया कुमारी मौर्य ने जिला बाल कल्याण समिति को दिए आवेदन में कहा है कि उसकी पुत्रियां — दिव्या, श्रुतिका और रितिका — को उनके पिता एवं दादी द्वारा अपने पास रखा गया है और यह सब उसकी इच्छा के विरुद्ध किया जा रहा है। *मिलने से रोका, प्रताड़ना के आरोप* आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि बच्चों को मानसिक दबाव में रखा जा रहा है और माता से संपर्क करने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती है। महिला ने इसे किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत दंडनीय बताया है तथा संविधान में प्रदत्त बाल संरक्षण संबंधी प्रावधानों का हवाला दिया है। *समिति से कठोर कार्रवाई की मांग* प्रार्थिया ने बाल कल्याण समिति से मांग की है कि— मामले की तत्काल एवं गोपनीय जांच कराई जाए उसे अपने बच्चों से मिलने और *संवाद का अधिकार दिलाया जाए* यदि बच्चों के साथ किसी प्रकार की प्रताड़ना पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई हो बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए अंतरिम संरक्षण या अभिरक्षा संबंधी आदेश पारित किए जाएं *बच्चों का हित सर्वोपरि* कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी अभिरक्षा विवाद में प्राथमिकता बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हित को दी जाती है। यदि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए जाते हैं तो बाल कल्याण समिति को त्वरित हस्तक्षेप का अधिकार है। अब इस प्रकरण में बाल कल्याण समिति की कार्रवाई निर्णायक मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि समिति बच्चों के हित में क्या कदम उठाती है।