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13-Feb-2026
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:: इंदौर के समीप बरलाई शुगर मिल की भूमि पर टेक्सटाइल क्लस्टर की तैयारी; कांग्रेस ने फूंका आंदोलन का बिगुल :: :: एमपीआईडीसी की प्लग-एंड-प्ले गारमेंट पार्क योजना के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे किसान; 18 से 28 फरवरी तक जिले की तहसीलों में होगा प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपेंगे ज्ञापन :: इंदौर (ईएमएस)। इंदौर महानगर से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सहकारिता के गौरव बरलाई शुगर मिल की भूमि को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) द्वारा मिल की लगभग 82 एकड़ (33 हेक्टेयर) भूमि को एक अत्याधुनिक टेक्सटाइल क्लस्टर के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव ने हजारों शेयरधारक किसानों के आक्रोश को भड़का दिया है। इस औद्योगिक योजना के खिलाफ कांग्रेस ने अब आर-पार की जंग का एलान करते हुए 18 फरवरी से जिलाव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। :: सहकारिता की विरासत पर प्लग-एंड-प्ले का प्रहार :: प्रस्तावित योजना के तहत सरकार यहाँ रेडीमेड गारमेंट उद्योग के लिए प्लग-एंड-प्ले (बनी-बनाई औद्योगिक संरचना) सुविधाएं विकसित करना चाहती है। किसान नेता कृपाराम सोलंकी और हंसराज मंडलोई ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि जिस दौर में जमीन के भाव 500 रू. प्रति बीघा थे, तब हजारों किसानों ने 1976 में 1000 रू. का अंशदान देकर इस संस्था की नींव रखी थी, उसे आज किसानों की सहमति के बिना कमर्शियल उपयोग के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। ब्रह्मलीन बापूसिंह मंडलोई और पूर्व मंत्री ब्रह्मलीन रामेश्वर पटेल के विजन से खड़ी हुई इस संस्था को 2002 में बंद करने के बाद अब इसकी जमीन को कौड़ियों के दाम बेचने या औद्योगिक क्लस्टर बनाने की तैयारी को किसानों के साथ बड़ा छल बताया जा रहा है। :: रणनीति : तहसील स्तर पर हल्लाबोल :: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल के नेतृत्व में इंदौर जिले की तहसीलों में आंदोलन का रोडमैप तैयार किया गया है: - 18 फरवरी (सांवेर) : विजय बंटी राठौर और हंसराज मंडलोई के नेतृत्व में मोर्चा। - 24 फरवरी (देपालपुर) : पूर्व जिला संघ अध्यक्ष राधेश्याम पटेल के नेतृत्व में हुंकार। - 28 फरवरी (महू) : प्रदेश सचिव शक्तिसिंह गोयल के नेतृत्व में धरना। इन प्रदर्शनों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन (एसडीएम) को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की जाएगी कि या तो यहाँ पुन: किसानों के हित में नई सहकारी संस्था बने, अन्यथा इस संपत्ति पर पहला अधिकार उन शेयरधारकों को मिले जिन्होंने इसे खड़ा किया था। :: गांधीवादी संघर्ष की चेतावनी :: कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई केवल एक जमीन के टुकड़े की नहीं, बल्कि सहकारिता के सिद्धांतों की है। यदि सरकार ने टेक्सटाइल क्लस्टर के नाम पर किसानों की पसीने की कमाई पर कब्जा करने की कोशिश नहीं रोकी, तो यह आंदोलन तहसील स्तर से निकलकर किसान अधिकार यात्रा के रूप में पूरे प्रदेश में फैलेगा। :: क्यों धधक रही है आक्रोश की आग? - मिल का सफरनामा : 1976 में प्रारंभ, 2002 में तालाबंदी - स्थान : इंदौर से मात्र 25 किमी दूर (बेशकीमती लोकेशन) - भूमि : 33 हेक्टेयर (लगभग 82 एकड़) - प्रस्तावित प्रोजेक्ट : टेक्सटाइल क्लस्टर (प्लग-एंड-प्ले गारमेंट पार्क) - ऐतिहासिक निवेश : जमीन की कीमत से दोगुना (1976 के शेयर मूल्य अनुसार) - प्रमुख मांग : या तो मिल पुनः शुरू हो, अन्यथा जमीन किसानों को लौटे प्रकाश/13 फरवरी 2026