राष्ट्रीय
13-Feb-2026


:: ब्याज सहित पूरी रकम और 15,000 जुर्माना भरेगी कंपनी; उपभोक्ता आयोग का ई-कॉमर्स दिग्गज पर कड़ा फैसला :: इंदौर (ईएमएस)। ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न को सेवा में कमी और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा सबक सिखाया है। गुणवत्ता खराब होने पर लौटाए गए करीब एक लाख रुपये के डिजाइनर लहंगों का रिफंड रोकने पर आयोग ने कंपनी को दोषी करार देते हुए पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और हर्जाना भरने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स की मनमानी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। वर्धमान नगर निवासी मयंक जैन ने अगस्त 2021 में अमेज़न के माध्यम से 97,998 रू. की कीमत के दो डिजाइनर लहंगा-चोली ऑर्डर किए थे। उत्पाद प्राप्त होने पर वे वेबसाइट पर दिखाए गए विवरण और गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए। उपभोक्ता ने नियमानुसार उत्पाद वापस कर दिए, लेकिन कंपनी ने उनकी जमा राशि वापस करने में टालमटोल शुरू कर दी। लंबी प्रतीक्षा और मानसिक परेशानी के बाद मयंक ने जागरूक उपभोक्ता समिति के सहयोग से आयोग का द्वार खटखटाया। :: आयोग की दो-टूक : जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं कंपनियां :: प्रकरण की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (क्रमांक-एक) के अध्यक्ष विकास राय, सदस्य कुंदन सिंह चौहान और डॉ. निधि बारंगे की पीठ द्वारा की गई। आयोग की सदस्य डॉ. निधि बारंगे ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत तर्क सेवा में दोष को नकारने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। आयोग ने माना कि इतनी बड़ी राशि का रिफंड रोकना उपभोक्ता के साथ अन्याय है और इसके लिए कंपनी पूरी तरह जवाबदेह है। ई-कॉमर्स कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहकों के भरोसे और कानून का उल्लंघन न करें। :: कोर्ट का फैसला : अब जेब ढीली करेगी कंपनी :: आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत कंपनी को 45 दिन के भीतर आदेशों के पालन का निर्देश दिया है। इसके तहत दोनों उत्पादों की कुल राशि एक लाख रुपये परिवादी को लौटाई जाएगी। साथ ही, दिसंबर 2021 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। मानसिक कष्ट के लिए 10 हजार रुपये का पृथक हर्जाना और कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी कंपनी को करना होगा। :: उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी नजीर :: यह निर्णय ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स की मनमानी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। आयोग ने आदेश की प्रति निशुल्क उपलब्ध कराने और इसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें। प्रकाश/13 फरवरी 2026