राज्य
14-Feb-2026
...


‎मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे और दूसरे मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदी बोलने वालों के खिलाफ दिए गए कथित द्वेषपूर्ण भाषणों की डिटेल्स जमा करें। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायाधीश गौतम अंखड की बेंच ने एक याचिका पर संज्ञान लिया है जिसमें राज ठाकरे के खिलाफ भड़काऊ और भड़काने वाले भाषणों के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश देने की मांग की गई है। जानकारी के अनुसार सुनील शुक्ला ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें अमराठी मुद्दे पर भड़काऊ भाषण देने के लिए मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग को मनसे की मान्यता रद्द करने का आदेश दिया जाए। इस याचिका की सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता याचिका से उत्तर भारतीय और अमराठी भाषा शब्द हटा दें। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि याचिका पर उसके बाद सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि पिछले कुछ सालों से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे मराठी भाषा के मुद्दे पर अग्रेसिव रहे हैं और लगातार हिंदी बोलने वालों को टारगेट कर रहे हैं। वह राज्य में उत्तर भारतीय-हिंदी बोलने वालों के साथ-साथ शुक्ला के खिलाफ भी हेट स्पीच देते हैं। इसी वजह से उत्तर भारतीय विकास सेना के अध्यक्ष सुनील शुक्ला ने बॉम्बे हाई कोर्ट में यह याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनकी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता द्वारा हिंदी बोलने वालों को धमकियां और हिंसा की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। शुक्ला ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय के सपोर्ट में शुरू किए गए अभियान के लिए राज ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें टारगेट किया है। शुक्ला ने साल 2024-25 में शिवाजी पार्क में मनसे द्वारा आयोजित गुड़ी पड़वा पर हुई सभा में राज ठाकरे द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों का जिक्र किया है। 30 मनसे कार्यकर्ताओं ने उनके ऑफिस में घुसकर तोड़फोड़ करने की कोशिश की थी। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर उन्हें जान से मारने की धमकी वाले मैसेज पोस्ट किए गए थे। शुक्ला ने याचिका में यह भी कहा है कि राज ठाकरे के भाषणों की वजह से बैंकों, मॉल और दूसरी जगहों पर हिंदी बोलने वाले कर्मचारियों को मराठी न बोलने की वजह से टारगेट किया जा रहा है। इससे मुंबई और आस-पास के इलाकों में मराठी-अमराठी विवाद हो गया है। संजय/संतोष झा- १४ फरवरी/२०२६/ईएमएस