राष्ट्रीय
14-Feb-2026
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-भगवान शिव वैराग्य को दर्शाते हैं, माता पार्वती गृहस्थ जीवन की प्रतीक हैं नई दिल्ली,(ईएमएस)। महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु महादेव की उपासना कर आत्मिक शांति और आशीर्वाद की कामना करते हैं। ​शिव परिवार को एक आदर्श परिवार माना जाता है। उनकी पूजा करने से घर में पारिवारिक सुख, शांति और सद्भाव आता है। यह पूजा इस बात का प्रतीक है कि कैसे अलग-अलग गुणों वाले सदस्य एक साथ प्रेम और सामंजस्य से रह सकते हैं। शिव परिवार की पूजा करने से आप एक साथ कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शिव सृष्टि के संहारक और तपस्वी हैं, पार्वती शक्ति और मातृत्व का प्रतीक हैं, गणेश बुद्धि, ज्ञान और विघ्नहर्ता हैं, और कार्तिकेय साहस और शक्ति के प्रतीक हैं। एक साथ इनकी पूजा करने से आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है। महादेव शिव की पूजा जीवन में संतुलन स्थापित करने में मदद करती है। भगवान शिव वैराग्य को दर्शाते हैं, जबकि माता पार्वती गृहस्थ जीवन की प्रतीक हैं। इन पूजा से यह संदेश मिलता है कि आध्यात्मिकता और सांसारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना अहम है। पुराणों में महादेव की कथाओं की जिस तरह का वर्णन किया गया है उनमें वह कृपालु, दयालु और जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले देवता के रूप में सामने आते हैं। सनातनी कहानियों के जरिए जब एक आदर्श परिवार का उदाहरण दिया जाता है तो श्रीराम से भी पहले शिव परिवार का नाम लिया जाता है। कहा जाता है कि सबसे ज्यादा तनाव वाला परिवार शिव परिवार ही है, जहां चाहें तो सभी एक-दूसरे के विरोधी हो सकते हैं। मसलन, शिव का वाहन नंदी एक बैल है, जबकि पार्वती का वाहन केहरि एक शेर है। शेर और बैल एक-दूसरे के विरोधी हैं। शिवजी के गले में पड़ा नाग, गणेश के वाहन चूहे का विरोधी है, तो वहीं कार्तिकेय का वाहन मोर, शिव के नाग का विरोधी है। आपस में इतना तनाव होने के बाद भी शिव परिवार में जो प्रेम है, वही प्रेम हमारे परिवारों में होना चाहिए। ऐसा कहा जाता है, इसीलिए शिव परिवार की एक साथ पूजा की जाती है। सिराज/ईएमएस 14फरवरी26