राष्ट्रीय
14-Feb-2026


आगरा,(ईएमएस)। पिछले साल सितंबर में दवाओं पर जीएसटी 18 और 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया था। इसके आधार पर फार्मा कंपनियों को दवाओं की एमआरपी कम करनी थी लेकिन फार्मा कंपनियों द्वारा सप्लाई की गईं दवाओं की नई खेप की एमआरपी से दवा कारोबारियों के होश उड़ गए हैं। फार्मा कंपनियों ने जीएसटी कम करने के बाद एमआरपी 10 फीसदी और बढ़ा दिया है। इससे दवाएं महंगी हो गईं हैं। पिछले साल 22 सितंबर को नई जीएसटी 2.0 व्यवस्था लागू होने के बाद जीवन रक्षक दवाओं पर शून्य फीसदी, 18 और 12 फीसदी जीएसटी वाली दवाओं पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आगरा फार्मा एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी ने बताया कि फार्मा कंपनियों द्वारा नई एमआरपी की दवाएं सप्लाई की गई हैं, जिन दवाओं पर 12 फीसदी जीएसटी थी, उन पर 5 फीसदी जीएसटी होने पर एमआरपी 6.25 फीसदी कम होनी थी। जैसे यूकोमेल्ट ए की एमआरपी 128.70 रुपये थी, जीएसटी 12 फीसदी से घटकर 5 फीसदी होने पर नई एमआरपी 120 रुपए होनी चाहिए थी, लेकिन अक्टूबर 2025 निर्मित यूकोमेल्ट ए पर एमआरपी 132.35 रुपए है। इस दवा पर कंपनी ने जीएसटी 5 फीसदी करने के बाद एमआरपी 10 फीसदी बढ़ा दी है इससे एमआरपी कम होने के बजाय बढ़ गई है। इसी तरह से अन्य दवाओं की एमआरपी भी बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सहायक औषधि आयुक्त ने बताया कि जो दवाएं राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण में आती हैं उनके अधिकतम मूल्य तय हैं, इसमें कैंसर, हृदय रोग समेत तीन हजार से ज्यादा दवाओं के साल्ट हैं अन्य दवाओं की एमआरपी पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी, कंपनियां जीएसटी ज्यादा ले रहीं हैं तो कार्रवाई की जाएगी। सिराज/ईएमएस 14फरवरी26