तेलअवीव,(ईएमएस)। भारत, इजरायल और अजरबैजान के बीच हाल ही में हथियारों को लेकर तनाव बढ़ गया है। अजरबैजान ने आर्मेनिया को बेच गए एक सुसाइड ड्रोन को लेकर नाराजगी जाहिर की है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत ने आर्मेनिया को दिया। यह ड्रोन इजरायली हारोप ड्रोन जैसा है। अजरबैजान का कहना है कि इसमें इजरायली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। अजरबैजान के अधिकारियों के अनुसार, यह एक स्ट्रैटजिक ड्रोन है और इससे उनकी सुरक्षा को खतरा है। रिपोर्ट की गई है कि आर्मेनियाई कंपनी द्वारा पेश किया गया ड्रैगनफ्लाई -3 ड्रोन तकनीकी रूप से हारोप जैसा है। एक अज्ञात डिफेंस अधिकारी का कहना है कि इसके पीछे की टेक्नोलॉजी भारत के जरिए आर्मेनिया पहुंची हो सकती है। बताया गया है कि यह भारत के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया ड्रोन है और इसमें होराप ड्रोन की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हुई है। होराप ड्रोन की खासियत यह है कि यह सिर्फ एक ड्रोन नहीं, बल्कि ड्रोन और मिसाइल का मिश्रण है। यह लक्ष्य पर सीधे हमला नहीं करता, बल्कि 9 घंटे तक हवा में मंडराता है और लक्ष्य की निगरानी करता है। जब यह सही लक्ष्य पहचान लेता है, तब अपने आप लक्ष्य पर टकराकर खुद को उड़ा देता है। इसमें करीब 23 किलो विस्फोटक क्षमता है और इसका ऑपरेशनल रेंज 1000 किलोमीटर से अधिक है। यह ड्रोन साइलेंट मोड में काम करता है, जिससे दुश्मन को इसका पता हमला होने से पहले नहीं चलता। अजरबैजान की प्रतिक्रिया में कहा गया है कि वे जानते हैं कि इजरायल ने आर्मेनिया को यह क्षमता नहीं दी, लेकिन भारत से टेक्नोलॉजी पहुंचने का सुझाव उन्हें खटकता है। अजरबैजान और इजरायल के रिश्ते कई मोर्चों पर मजबूत हैं; हाल ही में दोनों ने येरूशलम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एमओयू साइन किया था। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने कहा कि वह सभी अंतरराष्ट्रीय सहयोग सिर्फ कानून और डिफेंस मिनिस्ट्री के दिशानिर्देशों के अनुसार करता है। विश्लेषकों के अनुसार, अगर भारत ने तकनीकी जानकारी साझा की भी है,तब यह इजरायल की योजना के तहत नहीं, बल्कि आर्मेनिया की जरूरत के तहत हुआ होगा। यह मामला भारत और इजरायल के बीच दोस्ती पर प्रत्यक्ष असर डालने की संभावना नहीं दिखाता, लेकिन अजरबैजान की नाराजगी की वजह से क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समीकरणों में हलचल हो सकती है। इस घटना से स्पष्ट होता है कि आर्मेनिया-अजरबैजान विवाद में नई तकनीकी एंट्री और हथियारों की आपूर्ति ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। आशीष दुबे/ 14 फरवरी 2026