जवाबदेही आधारित सेवा मॉडल 80 ट्रेनों में लागू होगा, 124 मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनलों से 200 मिलियन टन वार्षिक क्षमता का लक्ष्य भोपाल (ईएमएस)। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और माल परिवहन तंत्र को अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में दो महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। पहला सुधार ट्रेनों में ऑन-बोर्ड सेवाओं को बेहतर, उत्तरदायी एवं तकनीक-सक्षम बनाने से संबंधित है। दूसरा सुधार ‘गति शक्ति कार्गो टर्मिनल नीति 2022’ के माध्यम से रेल आधारित लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। 1.स्वच्छता और तकनीक आधारित ऑन-बोर्ड सेवा मॉडल यात्रियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऑन-बोर्ड सेवाओं में व्यापक सुधार की पहल की गई है। इस नए मॉडल के तहत साफ-सफाई, लिनन प्रबंधन तथा लघु मरम्मत कार्यों को एकीकृत व्यवस्था के रूप में लागू किया जाएगा। बहु-कौशलयुक्त कर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो यात्रियों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क में रहेंगे और सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे। सेवा प्रदाताओं की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाएगी तथा तकनीक आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग और फीडबैक प्रणाली लागू की जाएगी। नई व्यवस्था के अंतर्गत सभी कोच, जिनमें सामान्य श्रेणी के डिब्बे भी शामिल हैं, उनके शौचालय, बेसिन एवं कचरा प्रबंधन की नियमित निगरानी की जाएगी। आवश्यकता अनुसार लघु मरम्मत, जल भराव समन्वय तथा सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की जांच एवं रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। इस सुधार को चरणबद्ध रूप से दो वर्षों में लागू किया जाएगा तथा देशभर में कुल 80 ट्रेनों में इसे लागू करने की योजना है। 2.‘गति शक्ति’ कार्गो टर्मिनलों से लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन माल परिवहन क्षेत्र में सुधार के तहत ‘गति शक्ति कार्गो टर्मिनल नीति 2022’ को प्रमुख कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस नीति के अंतर्गत कार्गो टर्मिनलों की स्वीकृति के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है तथा सामान्य उपयोगकर्ता सुविधाओं का विकास रेलवे व्यय से किया जाएगा। नीति के अनुसार रेलवे भूमि पर गोदाम, प्रसंस्करण इकाइयां, ग्राइंडिंग इकाइयां एवं एकत्रीकरण सुविधाओं के विकास की अनुमति दी गई है। अनुपयोगी माल शेडों को भी कार्गो टर्मिनलों के रूप में विकसित किया जा सकेगा। तीन वर्षों के भीतर 124 मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनलों के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनकी अनुमानित वार्षिक यातायात क्षमता लगभग 200 मिलियन टन आंकी गई है, जिससे लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक के संभावित राजस्व सृजन का अनुमान है। नई नीति के तहत 50 वर्ष तक के दीर्घकालिक अनुबंध, सरलीकृत विवाद निवारण तंत्र तथा मानक लेआउट व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। इससे रेल, सडक़, बंदरगाह और औद्योगिक गलियारों के बीच बेहतर बहु-मोडल समन्वय स्थापित होगा तथा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने की संभावना है। राजस्व वृद्धि और दक्षता की दिशा में पहल ‘गति शक्ति’ पहल के माध्यम से कार्गो गतिविधियों के एकीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे माल परिवहन अधिक सुव्यवस्थित और लागत प्रभावी बनेगा। गारंटीड रेल फ्रेट व्यवस्था के माध्यम से राजस्व वृद्धि की संभावना भी व्यक्त की गई है। प्रस्तुति में यह भी संकेत दिए गए हैं कि वर्ष 2025-26 में बल्क सीमेंट परिवहन में वर्ष 2024-25 की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने की संभावना है, जो रेल आधारित माल परिवहन में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। आशीष पाराशर/ईएमएस/14/02/2026