क्षेत्रीय
14-Feb-2026
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देवरी/सागर (ईएमएस)। सरकारी दफ्तरों में गोपनीयता और अनुशासन की बातें केवल कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। देवरी तहसील कार्यालय इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है, जहाँ अंधेर नगरी, चौपट राजा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। यहाँ एक निजी व्यक्ति, यशवंत कोष्टी, ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को अपने घेरे में ले रखा है। - कौन है यशवंत कोष्टी? किसका वरदहस्त है प्राप्त? तहसील कार्यालय में आने वाला हर ग्रामीण और किसान आज एक ही सवाल पूछ रहा है कि आखिर यशवंत कोष्टी है कौन? बिना किसी आधिकारिक नियुक्ति के वह शासकीय कंप्यूटरों पर बैठकर ऑर्डर शीट कैसे लिख रहा है? सूत्रों की मानें तो तहसील के कुछ रसूखदार अधिकारियों की शह पर यशवंत को यह अघोषित अधिकार मिला हुआ है। - भ्रष्टाचार की सिंगल विंडो-बिना सुविधा शुल्क के फाइल नहीं हिलती किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तहसील में होने वाले नामांतरण, फौती प्रकरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे कार्यों के लिए यशवंत कोष्टी ने अपनी एक रेट लिस्ट बना रखी है। जो किसान उसकी मांग पूरी करता है, उसका काम मिनटों में हो जाता है, और जो नियम-कायदे की बात करता है, उसकी फाइल महीनों तक धूल फांकती रहती है। - शासकीय गोपनीयता की धज्जियां- घर पर पहुँच रहीं फाइलें नियमों के मुताबिक, राजस्व विभाग की कोई भी फाइल या दस्तावेज कार्यालय परिसर से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। लेकिन देवरी तहसील में नियम ताक पर हैं। बताया जाता है कि यशवंत कोष्टी कई महत्वपूर्ण शासकीय फाइलें अपने घर ले जाता है और वहीं से सेटिंग का खेल चलता है। - मूकदर्शक बना अमला-आखिर इन कर्मचारियों की क्या मजबूरी? तहसील कार्यालय में तैनात आधिकारिक अमला इस प्रकार है- राकेश रेंकवार तहसीलदार के रीडर (शासकीय बाबू), सतीश प्रजापति (संविदा कर्मचारी), ब्रजलाल गौड़ (शासकीय चपरासी), राजेश अहिरवार (शासकीय कर्मचारी)। जब इतने जिम्मेदार कर्मचारी कार्यालय में मौजूद हैं, तो फिर यशवंत कोष्टी को कंप्यूटर पर बिठाने और उसे आर्डर शीट लिखने की अनुमति किसने दी? - क्षेत्रीय जनता ने कलेक्टर से सीधी जाँच की मांग देवरी की जनता और क्षेत्रीय किसानों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस मामले की आकस्मिक जाँच कराई जाए। तहसील कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक बाहरी व्यक्ति किस अधिकार से सरकारी कुर्सी पर बैठ रहा है। निखिल सोधिया/ईएमएस/14/02/2026