ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत अतीक अकील ने उठाया था मुददा भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज कुत्तों की नसबंदी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी सदस्यों के मध्य तीखी नोकझोंक हुई। यह मामला ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक अतीक अकील ने उठाया था। विधायक अतीक अकील ने आरोप लगाया कि शहर में कुत्तों की नसबंदी को लेकर केवल शोर मचाया गया, जबकि इसके लिए आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कुत्तों की नसबंदी के लिए 2 करोड रुपए की राशि आवंटित की, लेकिन कुत्ते कम होने के बजाय बढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों से छोटे-छोटे बच्चों की मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि रोजाना 40-50 लोगों को आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं हो रही है, इनमें बुजुर्ग, महिलाएं एवं बच्चे शामिल है। उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा रोजाना पकडकर कुत्तों का वेक्सीनेशन किया जा रहा है लेकिन आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। उनका यह भी कहना था कि श्मशान घाट और कब्रिस्तान जैसे स्थान आवारा कुत्तों के अड्डे बन गए हैं। उन्होंने भोपाल के पास शेल्टर होम बनाने की घोषणा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विधायक बजवर सिंह शेखावत ने कहा कि आवारा कुत्तों के मामलों की जिम्मेदारी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “हमारे कुत्ता मंत्री सुन ही नहीं रहे हैं।” इस पर आपत्ति जताते हुए विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि इंसान आतंकवादी होते हैं, लेकिन यहां कुत्तों को आतंकवादी बताया जा रहा है, जो उचित नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन को बताया कि इस मामले में चार विभाग शामिल हैं और सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि कुत्तों की नसबंदी के राजधानी में 30 नसबंदी केंद्र स्थापित किए है। साथ ही कुत्तों को 80 हजार 7 सौ से ज्यादा एंटी रैबीज इंजेक्शन भी लगाए गए है। उन्होंने कहा कि उनके पास आई स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कुत्ते के काटने से किसी की मौत हुई हो। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नसबंदी करने वाले डॉक्टरों की संख्या कम है और संसाधनों की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है। विपक्ष की ओर से बजट और भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए गए। इस बीच मंत्री प्रहलाद पटेल ने आपत्तिजनक शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई आरोप है तो उसके प्रमाण सदन के पटल पर रखे जाएं, केवल हवाई आरोप नहीं लगाए जा सकते। सुदामा नरवरे/17 फरवरी 2026