ज़रा हटके
18-Feb-2026
...


वाशिंगटन (ईएमएस)। क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य की गर्मी वास्तव में है क्या? लगभग 4.5 अरब वर्ष पुराना सूर्य महज गर्मी और रोशनी का स्रोत नहीं, बल्कि रहस्यों से भरा एक विशाल खगोलीय पिंड है, जिसकी संरचना और क्रियाएं वैज्ञानिकों के लिए आज भी शोध का विषय बनी हुई हैं। सूर्य एक ‘पीला बौना’ तारा है, जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना हुआ है। यह हमारे सौरमंडल का केंद्र है और पृथ्वी सहित सभी ग्रह इसी के चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी 93 मिलियन मील (150 मिलियन किमी) है। सौरमंडल का यह एकमात्र तारा पृथ्वी पर जीवन का आधार है। सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा ही प्रकाश, गर्मी और जीवन को संभव बनाती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, सूर्य देखने में भले ही स्थिर दिखता है, लेकिन वास्तव में यह लगातार ऊर्जा और कणों का विस्फोट करता रहने वाला एक अत्यंत गतिशील तारा है। सूर्य और उसके प्रभावों का अध्ययन ‘हीलियोफिज़िक्स’ कहलाता है। सूरज का आकार हमारी पृथ्वी से 109 गुना बड़ा है, और यदि यह खोखला होता तो इसमें करीब 13 लाख पृथ्वी समा सकती थीं। इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति ही सौरमंडल के ग्रहों, धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों को कक्षा में टिकाए रखती है। हालांकि सूर्य पृथ्वी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, पर ब्रह्मांड में यह एक सामान्य तारा माना जाता है। वैज्ञानिकों को इससे 100 गुना बड़े तारे भी मिल चुके हैं। कई तारकीय प्रणालियों में दो या उससे अधिक तारे एक साथ पाए जाते हैं। सूर्य का सबसे गर्म भाग उसका कोर है, जहां तापमान 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस से भी अधिक होता है। पृथ्वी से दिखाई देने वाली सतह को फोटोस्फीयर कहा जाता है, जिसका तापमान 5,500 डिग्री सेल्सियस है। यहीं से सूर्य का अधिकांश प्रकाश निकलता है। लेकिन वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा रहस्य इसका बाहरी वातावरण कोरोना है, जिसका तापमान सतह से दूर जाने पर उलटा बढ़ता जाता है और 2 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘कोरोना हीटिंग’ का यह रहस्य आज भी पूरी तरह समझ नहीं आया है। सूर्य का रेडियस करीब 7 लाख किलोमीटर है। इसका नजदीकी पड़ोसी तारा प्रॉक्सिमा सेंचुरी पृथ्वी से 4.24 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। सूर्य आकाशगंगा मिल्की वे के ओरियन स्पर में स्थित है और लगभग 4,50,000 मील प्रति घंटे की गति से गैलेक्सी के केंद्र की परिक्रमा करता है, जिसे पूरा करने में 230 मिलियन वर्ष लगते हैं। सूरज अपनी धुरी पर भी घूमता है, लेकिन ठोस न होने की वजह से इसके विभिन्न हिस्से अलग-अलग गति से घूमते हैं। यह हर 11 वर्ष के ‘सोलर साइकिल’ से गुजरता है, जो अंतरिक्ष के मौसम पर प्रभाव डालता है। सौर गतिविधि में वृद्धि से सैटेलाइट, जीपीएस और पावर ग्रिड प्रभावित हो सकते हैं, जिसके लिए एओएए स्पेस वेदर प्रिडिक्शन सेंटर समय-समय पर अलर्ट जारी करता है। सुदामा/ईएमएस 18 फरवरी 2026