ज़रा हटके
18-Feb-2026
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सैन फ्रांसिस्को (ईएमएस)। लोकप्रिय गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बच्चे घंटों बिताते हैं और इसी आड़ में अब एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से पनप रहा है। आतंकी और नफरत फैलाने वाले संगठन ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया का इस्तेमाल बच्चों को बहकाने और अपने नेटवर्क में जोड़ने के लिए करने लगे हैं। यह प्रवृत्ति दुनियाभर के सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बच्चों से पहले दोस्ती की जाती है और फिर धीरे-धीरे उन्हें हिंसक विचारधाराओं की ओर धकेला जाता है। कई मामलों में तो हथियारों के इस्तेमाल या हमलों के डिजिटल सिमुलेशन दिखाकर बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई डिजिटल पीढ़ी सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स में ज्यादा सक्रिय रहती है, जिससे उन्हें निशाना बनाना बेहद आसान हो गया है। रिसर्च संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कई गेम्स में मौजूद निजी सर्वर और चैट फीचर्स का इस्तेमाल बच्चों से संपर्क बनाने के लिए किया जाता है। शुरुआत में साधारण बातचीत और गेमिंग टिप्स के बहाने बच्चे विश्वास में लिए जाते हैं, इसके बाद उन्हें अलग-अलग प्राइवेट ग्रुप्स, क्लोज कम्युनिटीज और चैट चैनल्स में जोड़ा जाता है। इन्हीं जगहों पर कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती है और बच्चों को धीरे-धीरे ब्रेनवॉश किया जाता है। कुछ मामलों में तो गेम्स के भीतर ही ऐसे डिजिटल वर्ल्ड तैयार किए गए हैं, जहां आतंकी हमलों जैसी स्थितियों का सिमुलेशन होता है। बच्चे इन्हें सिर्फ गेम समझकर खेलते रहते हैं, लेकिन यह धीरे-धीरे उनकी सोच को हिंसक दिशा में मोड़ सकता है। यहां तक कि कुछ बच्चों को ऑनलाइन गाइड या वीडियो के माध्यम से विस्फोटक और हथियारों के बारे में जानकारी देने की कोशिश भी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता अपने बच्चों को इस खतरे से बचाने में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्हें बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए, गेमिंग टाइम को सीमित करना चाहिए और पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करना जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 18 फरवरी 2026