ज़रा हटके
18-Feb-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। पपीता का फल बुखार, पाचन समस्या, त्वचा संबंधी दिक्कतों और रक्त को शुद्ध करने तक, पूरे शरीर पर बहुआयामी प्रभाव डालता है। आयुर्वेद में पपीता को ‘अमृतफल’ कहा गया है। पपीते में मौजूद पपैन एंजाइम इसे विशेष बनाता है, जो पेट और आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर करता है। यही कारण है कि पपीता तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित करने के साथ स्वास्थ्य को मजबूत बनाए रखने में मददगार माना गया है। यह हर मौसम में आसानी से उपलब्ध होने वाला फल है, जो शरीर की शुद्धि, डिटॉक्स और पोषक तत्वों के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में पपीते के फल के साथ उसकी पत्तियों और बीजों को भी औषधीय गुणों के लिए खास स्थान दिया गया है। पत्तियों और बीजों का स्वाद भले ही कड़वा होता है, लेकिन इन्हें प्राकृतिक औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। बुखार, कमजोरी या रक्त में अशुद्धता की स्थिति में पपीते की पत्तियों को पानी में उबालकर तैयार किया गया काढ़ा बेहद लाभकारी होता है। यह रक्त को शुद्ध करता है, शरीर में ताकत बढ़ाता है और प्लेटलेट्स की संख्या में सुधार लाने में भी सहायक माना गया है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर पपीते के फल का नियमित सेवन और पत्तों का रस प्रतिरक्षा को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है। त्वचा से जुड़ी परेशानियों में पपीते का उपयोग सौंदर्य उपचार के रूप में भी किया जाता है। पपीते के गूदे में शहद मिलाकर फेसपैक के रूप में लगाने से त्वचा टाइट होती है, दाग-धब्बे हल्के होते हैं और चेहरा नेचुरल ग्लो से भर उठता है। इसके साथ ही नियमित सेवन और बाहरी उपयोग दोनों से त्वचा में निखार आता है। बालों की समस्या, विशेषकर झड़ने और रूखे होने पर पपीते के बीजों का पेस्ट बेहद उपयोगी माना जाता है। सप्ताह में एक बार पेस्ट लगाने से बाल मजबूत होते हैं और उनमें प्राकृतिक चमक लौट आती है। महिलाओं के लिए पपीता मासिक धर्म के दौरान भी मददगार है। आजकल के गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि के कारण बढ़ते मासिक धर्म संबंधी दर्द में पपीते का सेवन राहत पहुंचाता है। सुदामा/ईएमएस 18 फरवरी 2026