अंतर्राष्ट्रीय
18-Feb-2026
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-जमात का एजेंडा बांग्लादेश को पाकिस्तान की विचारधारा के करीब ले जाना है! ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रचंड जीत के बाद तारिक रहमान सत्ता की बागडोर संभालने जा रहे हैं, लेकिन खुफिया एजेंसियों का मानना है कि उनकी राह आसान नहीं होगी। मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार ने देश को जिस हालत में छोड़ा है, वहां से सब कुछ फिर से शुरू करना बहुत मुश्कल होगा। सबसे बड़ी चिंता जमात-ए-इस्लामी का उदय है, जिसने 77 सीटें जीतकर अपने इतिहास का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती विदेशी रिश्तों को सुधारना नहीं, बल्कि देश के अंदर गंदगी साफ करना है। अंतरिम सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान को तवज्जो दी। वीजा नियमों में ढील दी और समुद्री रास्ते खोल दिए। भारतीय एजेंसियों का दावा है कि यूनुस की इन गलतियों का फायदा उठाकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बांग्लादेश में हथियार, गोला-बारूद और आतंकी भेजे। इन्ही रास्तों से ड्रग्स की तस्करी कर भारत में नशा भेजा जा रहा है। रहमान को अब इस नेटवर्क को तोड़ना होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भले ही सरकार बीएनपी की बन रही हो, लेकिन जमात-ए-इस्लामी का कद बढ़ना खतरे की घंटी है। जो पार्टी कभी 20 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाती थी, वह आज 77 सीटों पर काबिज है। यह एक बड़ी छलांग है। जमात का एजेंडा 1971 के मुक्ति संग्राम की यादों को मिटाना और बांग्लादेश को पाकिस्तान की विचारधारा के करीब ले जाना है। रिपोर्ट में भारत की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। जमात ने पश्चिम बंगाल से सटे सीमावर्ती इलाकों में जीत हासिल की है। इन इलाकों में जमात की पकड़ मजबूत होने से कट्टरपंथ तेजी से फैलेगा, जो सीधे तौर पर भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए चुनौती है। बीएनपी के पास अपने दम पर बहुमत है, इसलिए उसे सरकार चलाने के लिए जमात की बैसाखी की जरूरत नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर जमात को सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली, तो वह कुंठा का शिकार होकर हिंसा और भीड़तंत्र को बढ़ावा दे सकती है। रहमान देश में सामान्य हालात चाहते हैं, इसलिए वे शायद जमात को खुली छूट न दें। सिराज/ईएमएस 18 फरवरी 2026