लेख
19-Feb-2026
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ब्रह्माकुमारीज मुख्यालय माउंट आबू में होने वाली मीडिया कांफ्रेंस में मोहाली चंडीगढ़ से राजयोगी भाई बीके करमचंद की सक्रियता सहज ही प्रभावित करती थी।शरीर मे बेहद दुबले-पतले ,किंतु लम्बाई में सहज ही आकर्षित करने वाले करमचंद भाई देखने मे जितने साधारण नज़र आते थे, उदबोधन में उतने ही विद्वान थे।अपनी बात सहज किंतु स्प्ष्ट रूप से रखना और प्रभावी ढंग से मीडिया बन्धुओं को तनावमुक्त पत्रकारिता के गुर सिखाना उन्हें बखूबी आता था।अनेक ऐसी मीडिया कांफ्रेंस रही जिनमे मुझे उनके साथ मंच साझा करने का अवसर मिला।दुसरो को सम्मान देने की कला में माहिर करमचंद भाई का ईश्वरीय सेवा के प्रति कर्मयोग ही उन्हें विशिष्ट बनाता था।अपने दायित्व को निष्ठा भाव से निभाने वाले करमचंद भाई प्रायः मंच से दूर ही रहते थे,स्वयं को आगे रखकर चलना उन्हें पसंद नही था,लेकिन ब्रह्माकुमारीज की मीडिया विंग के अधिशासी सदस्य होने के नाते जब किसी सत्र में उनसे अध्यक्षता या फिर संचालन कराया जाता तो वे अनुसाशित रूप से समयबद्धता के साथ अपने सत्र को सफल बनाने में भी पारंगत थे। उन्हें परमात्मा शिव द्वारा संचालित ब्रह्माकुमारीज में ब्रह्माबाबा से लेकर बड़ी दादियों व दादाओ की भरपूर पालना मिली।उन्हें बेहद का सेवाधारी, उमंग उत्साह वाले ब्रह्माकुमार ,दधीचि ऋषि की तरह यज्ञ में हड्डियां लगाने वाले ईश्वरीय सेवक, समर्पित बुद्धि व निश्चय बुद्धि के धनी माना जाता रहा है। करमचंद भाई 17 फ़रवरी की सांय 5:45 बजे शिव परमात्मा की गोद में चले गए । कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था । 12 फरवरी को उन्हें फोर्टिस अस्पताल में दिखाया गया।डॉक्टर ने दवाई बदलकर दी तो उनके स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार आया और वह स्वयं भी कुछ बेहतर फील कर रहे थे।लेकिन बाद में हालत बिगडने पर डॉक्टर की सलाह पर उन्हें 13 फ़रवरी को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करवाया गया ।जहां 2 दिन तक वे वेंटिलेटर पर रहे ,लेकिन अंततः उन्हें बचाया नही जा सका।करमचंद भाई का जन्म 7 दिसंबर सन 1948 को हरियाणा राज्य में हुआ था ।उन्हें अगस्त सन 1969 में ईश्वरीय ज्ञान मिला । शुरू से ही उन्हें चंडीगढ़ में अचल दीदी की पालना मिली ,जिससे जल्दी ही उन्होंने शिव परमात्मा को पहचान कर ईश्वरीय सेवाओं के लिए सन 1972 से ब्रह्माकुमारीज सेंटर पर रहना शुरू कर दिया।हालांकि उनके लौकिक परिवार में उनकी युगल और एक बच्ची वसुधा बहन है,वे दोनों भी परमात्मा शिव की सेवाओं में समर्पित हैं। करमचंद भाई सन 2003 से मोहाली चंडीगढ़ में अपनी सेवाऐं दे रहे थे ।उन्होंने पंजाब जो़न में अग्रणी होकर सेवाएं की हैं ।ब्रह्माकुमारीज पंजाब ज़ोन में मीडिया विंग के जो़नल कोऑर्डिनेटर और एग्जीक्यूटिव कमिटी के सक्रिय सदस्य के रूप में करमचंद भाई निरंतर सेवा करते रहे हैं। करमचंद भाई की पार्थिव देह का अंतिम संस्कार 18 फरवरी को दोपहर 1 बजे मोहाली शमशान घाट में किया गया।जिसके लिए उनकी अंतिम यात्रा मोहाली 7 फेस सेंटर से आरंभ हुई थी ।उनके अव्यक्त होने अर्थात निधन पर बीके प्रेम बहन व बीके उत्तरा ने कहा कि शिव परमात्मा की याद में रहकर मीडिया को रूहानियत का पाठ पढ़ाने वाले करमचंद भाई उन्हें सदैव याद रहेंगे।ब्रह्माकुमारीज के महासचिव एवम मिडियाविंग के चेयरपर्सन राजयोगी बीके करुणा भाई व मिडियविंग के नेशनल कॉर्डिनेटर बीके शांतनु ने उन्हें ईश्वरीय सेवा का एक ऐसा महारथी बताया जिन्होंने अपनी सेवाओं से अनेक मीडियाकर्मियों में सकारात्मक परिवर्तन किया।ऐसे रूहानी योद्धा करमचंद भाई को शत शत नमन। (लेखक ब्रह्माकुमारीज मिडियाविंग के आजीवन सदस्य व वरिष्ठ साहित्यकार है) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 19 फरवरी /2026